क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड राजनीति जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी छत्तीसगढ़

---Advertisement---

मुजतबा खामेनेई का चेहरा-होंठ जला, प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत:पैर काटने की नौबत, नकली पैर लगेगा; अब सेना के जनरल देश चला रहे

On: अप्रैल 24, 2026 10:55 पूर्वाह्न
Follow Us:
red and white modern breaking news youtube thumbnail
---Advertisement---

28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान में मुजतबा खामेनेई के पिता के ठिकाने पर हमला किया, तब से वह छिपकर रह रहे हैं। उसी हमले में उनके पिता, पत्नी और बेटे की मौत हो गई। मुजतबा खुद भी घायल हो गए और अब डॉक्टरों की एक टीम उनकी देखभाल कर रही है। उनसे मिलना बहुत मुश्किल है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान जो पेशे से हार्ट सर्जन हैं और स्वास्थ्य मंत्री भी उनके इलाज में शामिल रहे हैं। मुजबता से मिलने बड़े अधिकारी और सेना के कमांडर नहीं जाते, क्योंकि उन्हें डर है कि इजराइल उनके जरिए ठिकाने का पता लगाकर हमला कर सकता है। मुजतबा खामेनेई की हालत गंभीर रही है, लेकिन दिमाग से वह पूरी तरह एक्टिव हैं। उनके एक पैर का तीन बार ऑपरेशन हुआ है और अब उन्हें नकली पैर लगाना पड़ेगा। एक हाथ की भी सर्जरी हुई है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। उनके चेहरे और होंठ बुरी तरह जल गए हैं, जिससे बोलना मुश्किल है और आगे प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत पड़ेगी। यह पूरी जानकारी कई वरिष्ठ अधिकारियों, पूर्व अधिकारियों, सेना के लोगों और जानकारों से बातचीत के आधार पर सामने आई है। सभी ने अपनी पहचान छिपाने की शर्त पर यह सूचना दी क्योंकि मामला बहुत संवेदनशील है। कंपनी डायरेक्टर की तरह देश चला रहे मुजतबा जब अयातोल्ला अली खामेनेई ईरान के सुप्रीम लीडर थे, तब युद्ध, शांति और अमेरिका से बातचीत जैसे बड़े फैसले वही अकेले लेते थे। उनके पास पूरी ताकत थी। लेकिन उनके बेटे और अब के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई का वैसा रोल नहीं है। मुजतबा खामेनेई एक ऐसे नेता हैं जो सामने नहीं आते। मार्च में पद संभालने के बाद से उन्हें किसी ने देखा नहीं और उनकी आवाज भी सार्वजनिक रूप से नहीं सुनी गई। उनकी जगह अब ईरान की सेना, खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के बड़े कमांडर और उनसे जुड़े लोग, देश के अहम फैसले ले रहे हैं। सुरक्षा, युद्ध और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर वही सबसे ज्यादा असर रखते हैं। एक पूर्व सलाहकार अब्दोलरेजा दावरी के मुताबिक, मुजतबा देश को ऐसे चला रहे हैं जैसे किसी कंपनी का डायरेक्टर होता है, लेकिन असली फैसले ‘बोर्ड’ यानी सेना के जनरल मिलकर लेते हैं। मुजतबा उनके सुझावों पर काफी निर्भर हैं और फैसले सामूहिक रूप से होते हैं। जंग शुरू होने के बाद से गायब हैं मुजतबा मुजतबा ने अब तक कोई वीडियो या ऑडियो मैसेज नहीं दिया, क्योंकि वह कमजोर नहीं दिखना चाहते। उनकी तरफ से सिर्फ लिखित बयान जारी किए जाते हैं, जो ऑनलाइन डाले जाते हैं या टीवी पर पढ़े जाते हैं। उन तक संदेश पहुंचाने का तरीका भी बहुत अलग है। कागज पर लिखे संदेश लिफाफे में बंद करके एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाए जाते हैं, जो कार या बाइक से उनके छिपे ठिकाने तक जाते हैं। उनके जवाब भी इसी तरह वापस आते हैं। उनकी सुरक्षा, चोटें और उनसे संपर्क की कठिनाई की वजह से फिलहाल फैसले लेने की जिम्मेदारी सेना के जनरलों को दे दी गई है। हालांकि देश में अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराएं अभी भी मौजूद हैं, लेकिन असली ताकत अब सेना के पास है। मुजतबा का सेना से पुराना रिश्ता भी है, क्योंकि वह किशोर उम्र में ईरान-इराक युद्ध में लड़ चुके हैं और तभी से उनके कई करीबी संबंध बने। अली खामेनेई की मौत के बाद ताकतवर हुआ IRGC अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि इस युद्ध और ईरान के कई बड़े नेताओं की मौत के बाद ‘सिस्टम बदल गया है’ और नए नेता ज्यादा समझदार हैं। लेकिन हकीकत यह है कि ईरान की सरकार खत्म नहीं हुई है, बल्कि अब ताकत एक मजबूत और सख्त रुख वाली सेना के हाथ में चली गई है और धार्मिक नेताओं का प्रभाव कम हो रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मुजतबा अभी पूरी तरह कंट्रोल में नहीं हैं। वह औपचारिक रूप से फैसलों में शामिल जरूर हैं, लेकिन उन्हें अक्सर तैयार फैसले दिखाए जाते हैं। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी कहा कि अमेरिका के साथ परमाणु समझौते और शांति योजना से जुड़े प्रस्ताव मुजतबा को दिखाए जाते हैं और उनकी राय ली जाती है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), जिसे 1979 की इस्लामी क्रांति की रक्षा के लिए बनाया गया था, समय के साथ बहुत ताकतवर हो चुका है। उसने राजनीति, उद्योग, खुफिया तंत्र और मिडिल ईस्ट के कई समूहों में अपना प्रभाव बढ़ाया है। पहले वह अली खामेनेई के आदेशों का पालन करता था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। ईरान के हर अहम फैसले ले रही IRGC अली खामेनेई की मौत के बाद एक खाली जगह बनी, और उसी दौरान IRGC ने मुजतबा का समर्थन किया और उन्हें सुप्रीम लीडर बनाने में अहम भूमिका निभाई। अब वही असली ताकत बन गए हैं। आज IRGC के पास कई बड़े पद और ताकत हैं। उनके कमांडर, सुरक्षा परिषद के प्रमुख और सैन्य सलाहकार सभी अहम फैसलों में शामिल हैं। एक एक्सटपर्ट के मुताबिक, “मुजतबा नाम के नेता हैं, लेकिन असली ताकत उनके पास वैसी नहीं है जैसी उनके पिता के पास थी। वह काफी हद तक गार्ड्स पर निर्भर हैं।” जनरल्स इस युद्ध को सरकार के अस्तित्व के लिए खतरा मानते हैं और उनका कहना है कि उन्होंने हालात को काबू में कर लिया है। हर बड़े फैसले में वही आगे रहते हैं। उन्होंने होर्मुज बंद करने जैसे फैसले लिए, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा। ईरान के हमलों की रणनीति, खाड़ी देशों के खिलाफ कदम, और समुद्री रास्ता बंद करने जैसे फैसले भी गार्ड्स ने ही तय किए। अमेरिका के साथ अस्थायी युद्धविराम और बातचीत की मंजूरी भी उन्होंने ही दी। यहां तक कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से बातचीत के लिए गालिबाफ को आगे करने का फैसला भी गार्ड्स ने लिया। पहली बार सेना के कई जनरल सीधे बातचीत टीम का हिस्सा बने। साथ ही, युद्ध में मिली बढ़त का इस्तेमाल उन्होंने देश के अंदर अपने विरोधियों को पीछे करने में भी किया। राष्ट्रपति और विदेश मंत्री का रोल कमजोर हुआ राष्ट्रपति और उनकी कैबिनेट को लगभग किनारे कर दिया गया है और उन्हें सिर्फ देश के अंदर के काम, जैसे खाना, ईंधन और जरूरी सेवाएं चलाने पर ध्यान देने को कहा गया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची की भूमिका भी कम हो गई है और उनकी जगह संसद के स्पीकर गालिबाफ बातचीत में आगे आ गए हैं। मुजतबा खामेनेई इन फैसलों का विरोध शायद ही करते हैं और आमतौर पर जनरलों की बात मान लेते हैं। मुजतबा खामेनेई का सेना पर झुकाव इसलिए भी है क्योंकि वह नए नेता हैं और उनके पास अपने पिता जैसी राजनीतिक और धार्मिक पकड़ नहीं है। साथ ही, उनका सेना के साथ पुराना व्यक्तिगत रिश्ता भी है। मुजतबा ने 17 साल की उम्र में ईरान-इराक युद्ध में हिस्सा लिया था और हबीब बटालियन में रहे थे। वहीं से उनके रिश्ते बने, जो बाद में बड़े सैन्य और खुफिया पदों तक पहुंचे। उन्होंने धार्मिक शिक्षा भी पूरी की और अपने पिता के साथ काम करते हुए सैन्य और खुफिया ऑपरेशन संभाले। उनके करीबी लोगों में पूर्व खुफिया प्रमुख हुसैन ताएब, जनरल मोहसिन रेजाई और गालिबाफ शामिल हैं। ये लोग अक्सर साथ बैठकर काम करते थे और इन्हें पावर ट्रायंगल कहा जाता था। इन पर 2009 के चुनाव में हस्तक्षेप के आरोप भी लगे थे। आज भी यही रिश्ते उनके और जनरलों के बीच के समीकरण को तय कर रहे हैं। वे एक-दूसरे को बराबरी का मानते हैं, न कि ऊपर-नीचे के रिश्ते में। हालांकि, सभी फैसले सिर्फ जनरल नहीं लेते। ईरान की राजनीति में अलग-अलग धड़े हमेशा रहे हैं और मतभेद भी होते रहते हैं। राष्ट्रपति और विदेश मंत्री भी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में शामिल हैं। लेकिन मौजूदा हालात में जनरल ही हावी हैं और उनके बीच फिलहाल कोई बड़ा मतभेद नजर नहीं आता। राष्ट्रपति और IRGC के सोचने में फर्क हाल ही में जब अमेरिका और ईरान के बीच दूसरी दौर की बातचीत की तैयारी हो रही थी, तो जनरलों ने उसे रद्द कर दिया। वजह यह थी कि अमेरिका ने ईरान पर समुद्री नाकाबंदी जारी रखी हुई थी और ट्रम्प लगातार दबाव बना रहे थे। अमेरिका ने ईरान के दो जहाज भी जब्त कर लिए, जिससे जनरल और नाराज हो गए। उनका मानना था कि अमेरिका बातचीत नहीं, बल्कि दबाव बनाकर ईरान को झुकाना चाहता है। राष्ट्रपति पजशकियान और विदेश मंत्री अराघची बातचीत जारी रखना चाहते थे। उन्होंने युद्ध से हुए भारी आर्थिक नुकसान, जो करीब 300 अरब डॉलर बताया गया, और प्रतिबंध हटाने की जरूरत की बात कही। लेकिन जनरल्स की चली और बातचीत टूट गई। गालिबाफ को हकीकत का अंदाजा अब हालात साफ नहीं हैं। ट्रम्प ने सीजफायर बढ़ाया है, लेकिन नाकाबंदी जारी रखी है और ईरान से अपनी शर्तों पर शांति प्रस्ताव देने को कहा है। यह भी साफ नहीं है कि IRGC अमेरिका के साथ समझौते के लिए कितनी रियायत देंगी, खासकर परमाणु कार्यक्रम को लेकर। ईरान में एक सख्त रुख वाला धड़ा भी है, जो किसी भी समझौते के खिलाफ है और मानता है कि लड़ाई जारी रखकर अमेरिका और इजराइल को हराया जा सकता है। उनके समर्थक सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ लोग चाहते हैं कि मुजतबा खुद सामने आकर लोगों को संदेश दें, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ। तेहरान में रैलियों में लोग नारे लगा रहे हैं, “कमांडर, आदेश दो, हम तैयार हैं।” संसद के स्पीकर गालिबाफ ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान ने कुछ सैन्य सफलता हासिल की है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह अमेरिका से ज्यादा ताकतवर हो गया है। उन्होंने कहा कि अब इन उपलब्धियों का इस्तेमाल बातचीत में करना चाहिए।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

red and white modern breaking news youtube thumbnail

CG Ration: ई-केवाईसी के बिना नहीं मिलेगा 3 माह का एक साथ राशन, ऐसे करवाएं..

red and white modern breaking news youtube thumbnail

CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी गर्मी, 3 डिग्री तक चढ़ेगा पारा; 2 दिन बाद बारिश की संभावना

red and white modern breaking news youtube thumbnail

BCB: बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के फैसले से पाकिस्तान को लगा झटका, PSL के लिए मुस्तफिजुर को दिया एनओसी वापस लिया

red and white modern breaking news youtube thumbnail

‘मैं काफी अनकम्फर्टेबल थी’:काजोल ने डेब्यू वेब सीरीज के लिए 30 साल बाद नो-किस पॉलिसी तोड़ी थी, अब वजह बताई

red and white modern breaking news youtube thumbnail

मुस्तफिजुर-नाहिद पीएसएल 2026 के बचे हुए मैच नहीं खेलेंगे: बांग्लादेश बोर्ड ने एनओसी देने से इनकार किया; न्यूजीलैंड श्रृंखला के बाद नहीं लौटेंगे पाकिस्तान

red and white modern breaking news youtube thumbnail

Jangir Firing Case: घर में घुसकर फायरिंग, दो सगे भाई को मारी गोली; बड़े भाई की मौत, छोटा गंभीर

Leave a Comment

// Function to get current page info for sharing const currentUrl = window.location.href; const pageTitle = document.title; // --- 1. Follow Your Official Pages --- // These links go directly to the URLs you provided // Instagram Follow document.getElementById('wpliteInstagramFollow').addEventListener('click', function() { const instaUrl = 'https://www.instagram.com/worldprime.news?igsh=N3I0azl5ZTd1b3U5&utm_source=qr'; window.open(instaUrl, '_blank'); }); // Facebook Follow document.getElementById('wpliteFacebookFollow').addEventListener('click', function() { const fbUrl = 'https://www.facebook.com/share/1ATWDHQiYR/?mibextid=wwXIfr'; window.open(fbUrl, '_blank'); }); // --- 2. Share Current Page to Others --- // These remain as "Sharing" functions // WhatsApp Share document.getElementById('wpliteWhatsAppShare').addEventListener('click', function() { const whatsappUrl = 'https://api.whatsapp.com/send?text=' + encodeURIComponent(pageTitle + " " + currentUrl); window.open(whatsappUrl, '_blank'); }); // Twitter Share document.getElementById('wpliteTwitterShare').addEventListener('click', function() { const twitterUrl = 'https://twitter.com/intent/tweet?url=' + encodeURIComponent(currentUrl) + '&text=' + encodeURIComponent(pageTitle); window.open(twitterUrl, '_blank'); }); // --- 3. Mobile Native Share (The Floating Button) --- document.getElementById("mobileShareFloatingButton").addEventListener("click", function (e) { e.preventDefault(); if (navigator.share) { navigator.share({ title: pageTitle, url: currentUrl }) .then(() => console.log("Share successful")) .catch(err => console.error("Share failed", err)); } else { alert("Native sharing not supported. Use the icons below!"); } });