आजकल क्राइम थ्रिलर फिल्मों में गोलियां, गैंगस्टर और बदले की कहानियां नई बात नहीं रहीं। ऐसे में बेबी डू डाई डू अपने मुख्य किरदार की वजह से अलग नजर आती है। यहां एक ऐसी सुपारी किलर है, जो न बोल सकती है और न सुन सकती है, लेकिन हर मिशन को बिना शोर किए अंजाम देती है। निर्देशक नचिकेत सामंत ने इस कहानी को सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं बनाया, बल्कि मुंबई शहर की बदलती तस्वीर और उसके अंधेरे चेहरे को भी कहानी का हिस्सा बनाया है। फिल्म हर मोड़ पर चौंकाती नहीं, लेकिन अपने स्टाइल, माहौल और दमदार अभिनय के दम पर अंत तक दिलचस्प बनी रहती है। इस फिल्म की लेंथ 2 घंटा 5 मिनट है। दैनिक भास्कर ने इसे 5 में से 3 स्टार रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी कैसी है? कहानी की शुरुआत दो जुड़वां बहनों से होती है, जो बचपन में एक बंद पड़े होटल में पहुंच जाती हैं। वहां वे एक हत्या की गवाह बन जाती हैं। इस घटना में एक बहन की मौत हो जाती है, जबकि दूसरी की जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाती है। सालों बाद वही लड़की बेबी करमरकर (हुमा कुरैशी) के नाम से मुंबई की सबसे खतरनाक कॉन्ट्रैक्ट किलर बन चुकी होती है। वह गूंगी और बहरी है, लेकिन अपने हर मिशन को बेहद सटीक तरीके से अंजाम देती है। उसकी पहचान उसकी खास छतरी है, जो जरूरत पड़ने पर जानलेवा हथियार बन जाती है। बेबी का पालन पोषण पापा (चंकी पांडे) ने किया है, जो उसे एक के बाद एक
मूवी रिव्यू: बेबी डू डाई डू:मुंबई की गलियों में खामोश मौत का खेल…फिल्म में सिर्फ स्टाइल है या दमदार थ्रिलर भी?
By worldprime
On: जुलाई 3, 2026 5:01 अपराह्न
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