डेविड धवन की फिल्मों को देखने जाते वक्त दर्शक लॉजिक नहीं, हंसी ढूंढते हैं। गलतफहमियां, रिश्तों का गड़बड़झाला, भागदौड़ और ढेर सारी अफरा तफरी उनकी फिल्मों की पहचान रही है। है जवानी तो इश्क होना है भी उसी स्कूल की फिल्म है। यहां कहानी से ज्यादा जोर उन हालातों पर है जो धीरे धीरे इतने बेतुके हो जाते हैं कि दर्शक या तो हंसता है या फिर सिर पकड़कर बैठ जाता है। फिल्म में मनोरंजन के कुछ अच्छे पल जरूर हैं, लेकिन उन्हें पाने के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। फिल्म की कहानी जस एक खुशमिजाज लेकिन बेहद जोशीला इंसान है। उसकी पत्नी बानी उससे प्यार तो करती है, लेकिन उसकी जरूरतों और सोच के साथ तालमेल नहीं बैठा पाती। जस पिता बनना चाहता है, जबकि बानी उसकी इस जल्दबाजी और लगातार बढ़ते दबाव से परेशान हो चुकी है। बात इतनी बिगड़ जाती है कि वह जस से तलाक लेने का फैसला कर लेती है। टूटे हुए रिश्ते से बाहर निकलने की कोशिश में जस की जिंदगी में प्रीत की एंट्री होती है। दोनों करीब आते हैं और जस को लगता है कि जिंदगी फिर पटरी पर लौट रही है। लेकिन डेविड धवन की फिल्म में चीजें इतनी आसान कहां होती हैं। असली गड़बड़ तब शुरू होती है जब बानी और प्रीत दोनों गर्भवती हो जाती हैं और दोनों बच्चों का पिता जस निकलता है। इसके बाद फिल्म पूरी तरह गलतफहमियों, झूठ, छिपाने और एक के बाद एक पैदा होती
मूवी रिव्यू – ‘है जवानी तो इश्क होना है’:वरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग संभालती फिल्म, कमजोर कहानी और लंबाई बनी बड़ी चुनौती
By worldprime
On: जून 5, 2026 10:39 पूर्वाह्न
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