बारिश के मौसम में सर्दी-जुकाम, खांसी और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इससे बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं। नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव, घरों में सीलन और हवा में मौजूद फंगस-मोल्ड जैसे कई कारक संक्रमण के जोखिम को बढ़ाते हैं। सेंटर ‘SWORD’ स्टडी के अनुसार, मानसून के दौरान रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के मामले बढ़कर लगभग 13% हो जाते हैं, जबकि गर्मियों में यह आंकड़ा केवल 4% ही रहता है। 2014 में इंडियन जर्नल ऑफ चेस्ट डिजीज एंड अलाइड साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, बारिश में भीगने और लंबे समय तक गीले रहने से निमोनिया का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए आज ‘शारीरिक स्वास्थ्य’ में मानसून में निमोनिया के जोखिम के बारे में बात करेंगे। संदीप कटियार, सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर प्रश्न – निमोनिया क्या है? उत्तर – नीचे दिए गए पॉइंटर्स से समझें – प्रश्न – क्या मानसून में निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है? उत्तर – हाँ, बारिश में नमी के कारण वायरस और बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। इसके अलावा घर में सीलन और गंदगी से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। प्रश्न – निमोनिया का खतरा किसके लिए अधिक है? उत्तर – कुछ लोगों को
शारीरिक स्वास्थ्य- मानसून में बढ़ता निमोनिया का जोखिम: डॉक्टर से जानें इसका कारण और शुरुआती लक्षण, बचाव के लिए जरूरी 11 सावधानियां
By worldprime
On: जुलाई 13, 2026 4:30 पूर्वाह्न
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