साल 2024 में पेरिस की लाल मिट्टी पर जब राफेल नडाल आखिरी बार उतरे, तब दुनिया उन्हें सिर्फ एक महान टेनिस खिलाड़ी के रूप में नहीं देख रही थी। नेटफ्लिक्स की एक नई श्रृंखला में 39 वर्षीय स्पेनिश स्टार नडाल ने खुलासा किया है कि महानता हासिल करने के लिए उन्होंने अपने स्वास्थ्य के साथ कितने जोखिम उठाए। वर्ष 2005 में 19 वर्षीय नडाल ने पहली बार फ्रेंच ओपन खेला और पहले ही प्रयास में खिताब जीता। या. लंबे बाल, जबरदस्त ताकत और कभी हार न मानने वाले जज्बे ने दुनिया को अपना दीवाना बना लिया, लेकिन उसी साल एक ऐसी समस्या सामने आई, जिसने उनके पूरे करियर में प मैड्रिड ओपन के दौरान उनके बाएं पैर में गंभीर चोट लगी। पता चला कि उन्हें म्यूलर-वाइज सिंड्रोम नामक दुर्लभ बीमारी है। नडाल के पैरों में असहनीय दर्द होता है। डॉक्टरों को डर था कि शायद वह दोबारा टेनिस नहीं खेल पाएंगे, लेकिन नडाल ने हार नहीं मानी। हालांकि इसके बाद उन्हें लगभग हर मैच दर्द के साथ खेलना पड़ा। नडाल को हमेशा लगता था कि शायद यह उनका आखिरी सीजन हो। वह दर्द सहते रहे, क्योंकि उनके लिए खेल के प्रति जुनून? साल 2024 में पेरिस की लाल मिट्टी पर जब राफेल नडाल आखिरी बार उतरे, तब दुनिया उन्हें सिर्फ एक महान टेनिस खिलाड़ी के रूप में नहीं देख रही थी। लोग उस इंसान को देख रहे थे, जिसने दो दशक तक दर्द के साथ जीते हुए खेल को अपना सब कुछ दिया। नेटफ्लिक्स की एक नई सीरीज में, 39 वर्षीय स्पेनिश स्टार नडाल ने इस बात का खुलासा किया है कि महानता हासिल करने के लिए उन्होंने अपनी सेहत के साथ कितने जोखिम उठाए। साल 2005 में 19 वर्षीय नडाल ने पहली बार फ्रेंच ओपन खेला और पहले ही प्रयास में खिताब जीत लिया। लंबे बाल, जबरदस्त ताकत और कभी हार न मानने वाले जज्बे ने दुनिया को अपना दीवाना बना लिया, लेकिन उसी साल एक ऐसी समस्या सामने आई, जिसने उनके पूरे करियर में पीछा नहीं छोड़ा। मैड्रिड ओपन के दौरान उनके बाएं पैर में गंभीर चोट लगी। पता चला कि उन्हें म्यूलर-वाईस सिंड्रोम नाम की दुर्लभ बीमारी है। इसमें पैर की हड्डियों में असहनीय दर्द होता है। डॉक्टरों को डर था कि शायद वे दोबारा टेनिस नहीं खेल पाएंगे, लेकिन नडाल ने हार नहीं मानी। विशेष इनसोल (जूते के अंदर का पैड) की मदद से उन्होंने कोर्ट पर वापसी की। हालांकि इसके बाद उन्हें लगभग हर मैच दर्द के साथ खेलना पड़ा। नडाल को हमेशा लगता था कि शायद यह उनका आखिरी सीजन हो। यही सोच उन्हें रुकने नहीं देती थी। वह दर्द सहते रहे, क्योंकि उनके लिए खेल के प्रति जुन? साल 2024 में पेरिस की लाल मिट्टी पर जब राफेल नडाल आखिरी बार उतरे, तब दुनिया उन्हें सिर्फ एक महान टेनिस खिलाड़ी के रूप में नहीं देख रही थी। लोग उस इंसान को देख रहे थे, जिसने दो दशक तक दर्द के साथ जीते हुए खेल को अपना सब कुछ दिया। नेटफ्लिक्स की एक नई सीरीज में, 39 वर्षीय स्पेनिश स्टार नडाल ने इस बात का खुलासा किया है कि महानता हासिल करने के लिए उन्होंने अपनी सेहत के साथ कितने जोखिम उठाए। साल 2005 में 19 वर्षीय नडाल ने पहली बार फ्रेंच ओपन खेला और पहले ही प्रयास में खिताब जीत लिया। लंबे बाल, जबरदस्त ताकत और कभी हार न मानने वाले जज्बे ने दुनिया को अपना दीवाना बना लिया, लेकिन उसी साल एक ऐसी समस्या सामने आई, जिसने उनके पूरे करियर में पीछा नहीं छोड़ा। मैड्रिड ओपन के दौरान उनके बाएं पैर में गंभीर चोट लगी। पता चला कि उन्हें म्यूलर-वाईस सिंड्रोम नाम की दुर्लभ बीमारी है। इसमें पैर की हड्डियों में असहनीय दर्द होता है। डॉक्टरों को डर था कि शायद वे दोबारा टेनिस नहीं खेल पाएंगे, लेकिन नडाल ने हार नहीं मानी। विशेष इनसोल (जूते के अंदर का पैड) की मदद से उन्होंने कोर्ट पर वापसी की। हालांकि इसके बाद उन्हें लगभग हर मैच दर्द के साथ खेलना पड़ा। नडाल को हमेशा लगता था कि शायद यह उनका आखिरी सीजन हो। यही सोच उन्हें रुकने नहीं देती थी। वह दर्द सहते रहे, क्योंकि उनके लिए खेल के प्रति जुन?
39 वर्षीय नडाल ने चोटों को लेकर किए खुलासे: कहा- दर्द से ज्यादा बड़ा था टेनिस का जुनून, इंजेक्शन लगाकर जीता था 22वां ग्रैंडस्लैम
By worldprime
On: मई 31, 2026 2:50 अपराह्न
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