वैज्ञानिकों के शोध पत्र जितने गंभीर होते हैं, सम्मेलन वार्ता में उनके जोक्स उतने ही कम असरदार होते हैं। बी में छपी एक स्टडी के अनुसार 14 जीव विज्ञान सम्मेलनों की 531 प्रस्तुतियों में किए गए हंसी-मजाक के 66 प्रतिशत प्रयास फेल हुए। इस स्टडी में कुल 870 जोक्स दर्ज किए गए जिनमें से केवल 9 प्रतिशत पर ही पूरी ऑडियंस ने खुलकर हँसा। इस अध्ययन के सह-लेखक विक्टोरिया स्टाउट के अनुसार वैज्ञानिक हास्य को आवश्यक कौशल नहीं मानते हैं। रूमर लोगों को आपको याद रखने में मदद करता है और सहयोग करने की संभावना भी बढ़ाता है। पुरुषों ने मंच पर अधिक चुटकुले सुनाए और मजाक करने का जोखिम उठाया। कुल प्रस्तुतियों में लगभग 60% में कम से कम एक बार हंसी का माहौल बनाने की कोशिश की गई। 40% वैज्ञानिकों ने अपनी बात को पूरी तरह से गंभीरता से लिया, ताकि मजाक में असफल होने का कोई खतरा न हो। टाउट ने पीएचडी की बोरियत दूर करने के लिए वक्ताओं के जोक्स नोट किए, जो बाद में?
531 प्रस्तुतियों में बताए गए 870 चुटकुलों पर आधारित रिपोर्ट: वैज्ञानिकों के 66% जोक्स फ्लॉप, केवल 9% पर खुलकर हंसी: अध्ययन
By worldprime
On: मार्च 24, 2026 4:07 अपराह्न
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