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UGC New Rules: देशभर में UGC के नए नियमों का विरोध, सवर्ण समाज में गुस्सा, जानिए क्यों हो रहा हंगामा..

On: जनवरी 27, 2026 6:48 अपराह्न
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ugc new rules: देशभर में ugc के नए नियमों का विरोध, सवर्ण समाज में गुस्सा, जानिए क्यों हो रहा हंगामा..
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UGC New Rules: देशभर में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर विरोध तेज हो गया है। जनरल कैटेगरी के छात्र और सवर्ण समाज इन नियमों को पक्षपातपूर्ण बताते हुए सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नए रेगुलेशन उन्हें पूर्वानुमानित अपराधी की तरह पेश करते हैं और उच्च शिक्षा संस्थानों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। (UGC नियम सवर्ण समाज विरोध)

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दिल्ली स्थित UGC मुख्यालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रदर्शनकारियों को परिसर में प्रवेश से रोकने के लिए भारी संख्या में बैरिकेडिंग की गई है। इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि किसी भी नियम का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा और किसी भी छात्र के साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं होगा। (UGC नियमों का विरोध)

वहीं UGC के नए नियमों को चुनौती देते हुए अधिवक्ता विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में नियमों पर रोक लगाने, सभी छात्रों के लिए समान अवसर और इक्विटी हेल्पलाइन की सुविधा सभी वर्गों के लिए लागू करने की मांग की गई है।(UGC Protest)

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क्यों हो रहा है UGC के नियमों का विरोध

UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।’ (UGC Regulation 2026) इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं।

ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताकर विरोध हो रहा है।

आलोचकों का कहना है कि सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का कहना है कि नए नियम कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपसों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी।

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UGC ने नए नियमों के तहत 3 बड़े बदलाव किए

1. जातीय भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा दी गई

इस परिभाषा में कहा गया है, ‘जाति, धर्म, नस्ल, लिंग, पैदाइश के स्थान, विकलांगता के आधार पर कोई भी अनुचित या पक्षपाती व्यवहार, जो पढ़ाई में बराबरी में बाधा बने या मानव गरिमा के खिलाफ हो, उसे जातिगत भेदभाव माना जाएगा।’ जबकि ड्राफ्ट में जातीय भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा नहीं थी।

2. परिभाषा में OBC को भी शामिल किया गया

इस परिभाषा में ‘SC/ST के अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC छात्रों को शामिल किया गया है। कहा गया है कि इनके खिलाफ किसी भी अनुचित या पक्षपातपूर्ण व्यवहार को जाति-आधारित भेदभाव माना जाएगा। जबकि ड्राफ्ट में OBC को शामिल नहीं किया गया था।

3. झूठी शिकायत करने पर सजा का प्रावधान हटाया गया

ड्राफ्ट में झूठी शिकायतों को कम करने के लिए प्रावधान था। इसमें कहा गया था कि अगर झूठी या जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण तरीके से किसी के खिलाफ शिकायत की गई, तो शिकायत करने वाले को आर्थिक दंड या कॉलेज से सस्पेंड भी किया जा सकता है। अब लागू हुए फाइनल नियमों से ये प्रावधान हटा लिया गया है।

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UGC के नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

UGC के नए को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है। एडवोकेट विनीत जिंदल की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि ये नियम जनरल कैटेगरी के साथ भेदभाव करते हैं और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

याचिका में रेगुलेशन 3(सी) के कार्यान्वयन पर रोक लगाने की मांग की गई है और कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि 2026 के नियमों के तहत निर्मित ढांचा सभी जातियों के व्यक्तियों पर समान रूप से लागू हो।

 

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