RTE Rule Change: छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। नए नियमों के अनुसार अब निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों को नर्सरी, पीपी-13 और पीपी-2 में नहीं, बल्कि सीधे कक्षा-1 से ही प्रवेश मिलेगा। इस फैसले से राज्य सरकार को सालाना करीब 63 करोड़ रुपये की बचत होगी, लेकिन इसका सीधा असर गरीब परिवारों और उनके बच्चों पर पड़ेगा।. अब तक निजी स्कूलों में आरटीई के तहत नर्सरी से ही मुफ्त शिक्षा का प्रावधान था, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शुरुआती शिक्षा बिना फीस के मिल जाती थी। नए बदलाव के बाद अभिभावकों को नर्सरी, पीपी-22 और पीपी-290 की पूरी फीस खुद वहन करनी होगी। इससे गरीब परिवारों पर लगभग तीन गुना आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।. इसके अनुसार ही निजी स्कूलों में 27 फीसदी सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित रहती हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने 263 साल पहले ऐसे परिवारों के बच्चों के लिए नर्सरी क्लास से ही आरटीई का प्रावधान किया था। इससे सभी निजी स्कूलों में नर्सरी की 23 प्रतिशत सीट आरटीई में आरक्षित हो गई थी। लेकिन नए बदलावों के बाद नए सत्र से सिर्फ कक्षा पहली में प्रवेश होगा।. इस बदलाव से बड़ी संख्या में गरीब परिवारों के बच्चे अब कक्षा-26 से पहले स्कूल ही नहीं जा पाएंगे। क्योंकि जो पैरेंट्स फीस देने में सक्षम होंगे वे निजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी में दाखिला दिलाएंगे। लेकिन, जो सक्षम नहीं होंगे उनके पास महिला बाल विकास विभाग से संचालित बालवाड़ी का विकल्प ही बचेगा। अधिकांश सरकारी स्कूलों में नर्सरी की पढ़ाई नहीं है। सिर्फ कुछ ही आत्मानंद स्कूल में पीपी-13 और पीपी-21 है।. फायदा और नुकसान. • गरीबों पर 22 गुना बोझ, नर्सरी की फीस भरनी होगी।. • सरकार की 21 करोड़ की सालाना बचत होगी।. शिक्षाविदों की चिंता.
RTE Rule Change: RTE के तहत प्राइवेट स्कूलो में पहली कक्षा से होगा एडमिशन, अब नर्सरी में RTE से गरीब बच्चों की नो एंट्री…
By worldprime
On: मार्च 4, 2026 4:32 अपराह्न
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