रायपुर : छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय की निष्क्रियता के चलते छत्तीसगढ़ में पुलिस तंत्र का अपराधिकरण जोरो पर है,इसका खामियाज़ा राज्य की बीजेपी सरकार को उठाना पड़ रहा है|पुलिस मुख्यालय के साथ-साथ छत्तीसगढ़ शासन की मान-प्रतिष्ठा दांव पर है|प्रदेश में कानून व्यवस्था की कमजोर कड़ी के साथ-साथ कई इलाकों में अफीम की बेरोक-टोक अवैध खेती के मामले में पुलिस महकमे की लचर भूमिका से बीजेपी सरकार मुश्किल में है|जबकि,वर्दी में जारी अपराधों के सिलसिले से पुलिस की छवि ना केवल धूमिल हो चुकी है,बल्कि दागी और निलंबित पुलिस अधिकारियों को मिल रहे अनुचित सरकारी और राजनैतिक संरक्षण से “सुशासन” का दम निकल रहा है | कारोबारी दीपक टंडन मामले में जाँच में दोषी पाई गई DSP कल्पना वर्मा की पिछले दरवाज़े’ से बहाली की तैयारी से पुलिस मुख्यालय में पदस्थ ईमानदार छवि के कई अधिकारी हैरत में है उन्हें समझ में नहीं आ रहा है,कि वर्दी में अपराधों को अंजाम देने के बावजूद सिस्टम निलंबित DSP के ढाल का काम क्यों कर रहा है ? नक्सल गोपनीयता लीक के आरोप सिद्ध फिर भी राहत क्यों ? यह भी पढ़े : 11 हजार की सैलरी, 165 करोड़ का खेल ! छत्तीसगढ़ पुलिस के केस में CBI की एंट्री,पुलिस ने प्रकरण दबाया या आरोपियों को बचाया ? FIR दर्ज़,निगाहें रिश्वतखोर पुलिस अफसर पर… निलंबित DSP कल्पना वर्मा केस में बड़ा खेल
वर्दी में ‘पावर गेम’ ! निलंबन के बाद भी दागियों की ऐश, ना विभागीय जांच का आरोप पत्र और ना FIR, DSP कल्पना वर्मा पर कार्रवाई क्यों ठंडी ? PHQ की मेहरबानी या दबाव ?
By worldprime
On: अप्रैल 2, 2026 4:01 अपराह्न
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