अमेरिका के महानतम रेसर्स में से एक और 86 वर्षीय मारियो एंड्रेटी फॉर्मूला-1 में ड्राइवर्स चैम्पियनशिप जीतने वाले मात्र दो अमेरिकियों में से एक हैं। इसके अल मारियो की यह कहानी हर उस इंसान के लिए एक बड़ा सबक है, जो अप जीवन या करियर में शिखर पर पहुंचना चाहता है। मारियो अपनी सफलता का सबसे बड़ा राज अपनी सोच को मानते हैं। वे कहते हैं, ‘मुझे औसत होने से नफरत है। मैं इसका बिल्कुल सम्मान नहीं करता, क्योंकि यह बहुत सुविधाजनक है। इसमें कोई तनाव नहीं है।’ उस दौर के महानतम रेसर मारियो ने शुरुआती दिनों की एक किस्सा साझा करते हुए बताया- ए.जे. फोयट थे। वे मारियो से पांच साल बड़े और एक स्थापित चैंपियन थे। मारियो के क्रू चीफ ने उनसे कहा था कि मारियो, बस कार को सुरक्षित वापस लाओ। फोयट को हराने के लिए लेकिन मारियो ने सोचा कि अगर वे उन्हें हरा ही नहीं सकते, तो वे इस रेस में क्या कर रहे हैं? मारियो ने हार नहीं मानी। उन्होंने सीधे शीर्ष पर पहुंचने का लक्ष्य रखा और जब उन्होंने फोयट को हराया, तो वह उ? अमेरिका के महानतम रेसर्स में से एक और 86 वर्षीय मारियो एंड्रेटी फॉर्मूला-1 में ड्राइवर्स चैम्पियनशिप जीतने वाले मात्र दो अमेरिकियों में से एक हैं। इसके अलावा उन्होंने इंडियानापोलिस 500 और डायटोना 500 जैसे मोटर रेसिंग के सबसे प्रतिष्ठित खिताब भी जीते हैं। मारियो की यह कहानी हर उस इंसान के लिए एक बड़ा सबक है, जो अपने जीवन या करियर में शिखर पर पहुंचना चाहता है। मारियो अपनी सफलता का सबसे बड़ा राज अपनी सोच को मानते हैं। वे कहते हैं, ‘मुझे औसत होने से नफरत है। या यूं कहें कि मैं इसका बिल्कुल सम्मान नहीं करता, क्योंकि यह बहुत सुविधाजनक है। इसमें कोई स्ट्रेस नहीं है।’ जब उन्होंने रेसिंग के टॉप लेवल पर कदम रखा, तो उनका लक्ष्य सिर्फ हिस्सा लेना नहीं था, बल्कि उन दिग्गजों को हराना था जो उस समय शिखर पर थे। शुरुआती दिनों का एक किस्सा साझा करते हुए मारियो बताते हैं- उस दौर के महानतम रेसर्स में से एक ए.जे. फोयट थे। वे मारियो से पांच साल बड़े और एक स्थापित चैम्पियन थे। मारियो के क्रू चीफ ने उनसे कहा था कि मारियो, बस कार को सुरक्षित वापस ले आओ। फोयट को हराने के बारे में सोचना भी मत। लेकिन मारियो ने सोचा कि अगर वे उन्हें हरा ही नहीं सकते, तो वे इस रेस में कर क्या रहे हैं? मारियो ने हार नहीं मानी। उन्होंने सीधे टॉप पर पहुंचने का लक्ष्य रखा और जब उन्होंने फोयट को हराया, तो वह उ? अमेरिका के महानतम रेसर्स में से एक और 86 वर्षीय मारियो एंड्रेटी फॉर्मूला-1 में ड्राइवर्स चैम्पियनशिप जीतने वाले मात्र दो अमेरिकियों में से एक हैं। इसके अलावा उन्होंने इंडियानापोलिस 500 और डायटोना 500 जैसे मोटर रेसिंग के सबसे प्रतिष्ठित खिताब भी जीते हैं। मारियो की यह कहानी हर उस इंसान के लिए एक बड़ा सबक है, जो अपने जीवन या करियर में शिखर पर पहुंचना चाहता है। मारियो अपनी सफलता का सबसे बड़ा राज अपनी सोच को मानते हैं। वे कहते हैं, ‘मुझे औसत होने से नफरत है। या यूं कहें कि मैं इसका बिल्कुल सम्मान नहीं करता, क्योंकि यह बहुत सुविधाजनक है। इसमें कोई स्ट्रेस नहीं है।’ जब उन्होंने रेसिंग के टॉप लेवल पर कदम रखा, तो उनका लक्ष्य सिर्फ हिस्सा लेना नहीं था, बल्कि उन दिग्गजों को हराना था जो उस समय शिखर पर थे। शुरुआती दिनों का एक किस्सा साझा करते हुए मारियो बताते हैं- उस दौर के महानतम रेसर्स में से एक ए.जे. फोयट थे। वे मारियो से पांच साल बड़े और एक स्थापित चैम्पियन थे। मारियो के क्रू चीफ ने उनसे कहा था कि मारियो, बस कार को सुरक्षित वापस ले आओ। फोयट को हराने के बारे में सोचना भी मत। लेकिन मारियो ने सोचा कि अगर वे उन्हें हरा ही नहीं सकते, तो वे इस रेस में कर क्या रहे हैं? मारियो ने हार नहीं मानी। उन्होंने सीधे टॉप पर पहुंचने का लक्ष्य रखा और जब उन्होंने फोयट को हराया, तो वह उ?
मारियो अमेरिका के महान रेसर, ‘औसत’ होने से नफरत थी:सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को हराने पर फोकस, संतुष्ट होने के बजाय खुद को चुनौती देते रहे
By worldprime
On: अप्रैल 20, 2026 12:44 अपराह्न
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