दुनिया अक्सर कामयाबी को सिर्फ उपलब्धियों में मापती है। कितने मैच जीते, कितने रिकॉर्ड बनाए, कितनी बार लोगों की उम्मीदों पर खरे उतरे। मुझे लगता है कि किसी मनुष्य की असली ताकत सिर्फ उसके किए हुए कामों में नहीं, बल्कि उन चीजों में भी छिपी होती है जिन्हें करने से उसने इनकार किया। और टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने सिर्फ जीतना नहीं सीखा, बल्कि सही समय पर ‘ना’ कहना भी सीखा और शायद यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई। जापान की ओसाका जैसे-जैसे सफल होती गई वैसे-वैसे उनके आसपास उम्मीदों का दायरा भी बढ़ता गया जैसे शानदार प्रदर्शन, मुस्कुराहट, इंटरव्यू, हर मंच पर मौन ओसाका भी लंबे समय तक हर किसी को खुश रखने की कोशिश करती रहीं। वह बताती हैं, ‘मुझे हमेशा लगता था कि अगर मैंने किसी चीज के लिए मना किया तो लोग निराश हो जाते हैं। लेकिन धीरे-धीरे यह आदत बोझ बनने लगी। लगातार काम, मानसिक दबाव, खुद को हर समय साबित करने की कोशिश ने उन्हें थका दिया। बाहर से वे सफल खिलाड़ी दिखती थीं, ल फिर उन्होंने साल 2021 के फ्रेंच ओपन से हटने का फैसला कर लिया। यह फैसला खेल जगत के लिए चौंकाने वाला था। आलोचना भी हुई, सवाल भी उठे। लेकिन ओसाका के लिए यह सिर्फ एक फैसला नहीं था, बल्कि खुद को बचाने की शु? दुनिया अक्सर कामयाबी को सिर्फ उपलब्धियों में मापती है। कितने मैच जीते, कितने रिकॉर्ड बनाए, कितनी बार लोगों की उम्मीदों पर खरे उतरे। लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि किसी इंसान की असली ताकत सिर्फ उसके किए हुए कामों में नहीं, बल्कि उन चीजों में भी छिपी होती है जिन्हें करने से उसने इनकार किया। दुनिया की मशहूर टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने सिर्फ जीतना नहीं सीखा, बल्कि सही समय पर ‘ना’ कहना भी सीखा और शायद यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। जापान की ओसाका जैसे-जैसे सफल होती गईं, वैसे-वैसे उनके आसपास उम्मीदों का दायरा भी बढ़ता गया जैसे कि शानदार प्रदर्शन, मुस्कुराहट, इंटरव्यू, हर मंच पर मौजूदगी। ओसाका भी लंबे समय तक हर किसी को खुश रखने की कोशिश करती रहीं। वे बताती हैं, ‘मुझे हमेशा लगता था कि अगर मैंने किसी चीज के लिए मना किया तो लोग निराश हो जाएंगे।’ लेकिन धीरे-धीरे यह आदत बोझ बनने लगी। लगातार काम, मानसिक दबाव, खुद को हर समय साबित करने की कोशिश ने उन्हें थका दिया। बाहर से वे सफल खिलाड़ी दिखती थीं, लेकिन अंदर एक संघर्ष चल रहा था। फिर उन्होंने साल 2021 के फ्रेंच ओपन से हटने का फैसला कर लिया। यह फैसला खेल जगत के लिए चौंकाने वाला था। आलोचना भी हुई, सवाल भी उठे। लेकिन ओसाका के लिए यह सिर्फ एक फैसला नहीं था, बल्कि खुद को बचाने की शु? दुनिया अक्सर कामयाबी को सिर्फ उपलब्धियों में मापती है। कितने मैच जीते, कितने रिकॉर्ड बनाए, कितनी बार लोगों की उम्मीदों पर खरे उतरे। लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि किसी इंसान की असली ताकत सिर्फ उसके किए हुए कामों में नहीं, बल्कि उन चीजों में भी छिपी होती है जिन्हें करने से उसने इनकार किया। दुनिया की मशहूर टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने सिर्फ जीतना नहीं सीखा, बल्कि सही समय पर ‘ना’ कहना भी सीखा और शायद यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। जापान की ओसाका जैसे-जैसे सफल होती गईं, वैसे-वैसे उनके आसपास उम्मीदों का दायरा भी बढ़ता गया जैसे कि शानदार प्रदर्शन, मुस्कुराहट, इंटरव्यू, हर मंच पर मौजूदगी। ओसाका भी लंबे समय तक हर किसी को खुश रखने की कोशिश करती रहीं। वे बताती हैं, ‘मुझे हमेशा लगता था कि अगर मैंने किसी चीज के लिए मना किया तो लोग निराश हो जाएंगे।’ लेकिन धीरे-धीरे यह आदत बोझ बनने लगी। लगातार काम, मानसिक दबाव, खुद को हर समय साबित करने की कोशिश ने उन्हें थका दिया। बाहर से वे सफल खिलाड़ी दिखती थीं, लेकिन अंदर एक संघर्ष चल रहा था। फिर उन्होंने साल 2021 के फ्रेंच ओपन से हटने का फैसला कर लिया। यह फैसला खेल जगत के लिए चौंकाने वाला था। आलोचना भी हुई, सवाल भी उठे। लेकिन ओसाका के लिए यह सिर्फ एक फैसला नहीं था, बल्कि खुद को बचाने की शु?
फ्रेंच ओपन से हटने पर नाओमी की आलोचना हुई थी: बोलीं- दूसरों को खुश करने में हम खुद को खो देते हैं, ‘ना’ कहना जरूरी
By worldprime
On: मई 17, 2026 3:23 अपराह्न
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