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मुंबई- मुहर्रम जुलूस में 14,900 जहीरेल कैप्सूल बांटने पहुंचा शख्स:इनमें चूहे मारने वाला जहर मिलाया था, हर कैप्सूल में 1-1 ग्राम जहर था; गिरफ्तार

On: जून 27, 2026 5:21 अपराह्न
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मुंबई में मुहर्रम जुलूस में बड़ी साजिश का मामला सामने आया है। पुलिस ने एक शख्स को चूहे मारने वाले जहर से भरे 14,900 कैप्सूल के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि बायकुला के मुहर्रम जुलूस में एक संदिग्ध लोगों को कैप्सूल बांटने की फिराक में घूम रहा था, जिसे शुरू में वहां से हटा दिया गया। उसी जुलूस में एक शख्स का पेट दर्द और उल्टी होने लगी। पूछताछ में शख्स ने बताया कि उसने एक व्यक्ति से कैप्सूल लेकर खाया था। इसके बाद पुलिस ने उस संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उसने माना कि वह मुहर्रम के जुलूस में सारे कैप्सूल बांटने वाला था। आरोपी की पहचान फैयाज प्रेमजी के रूप में हुई है, जो पुणे का रहने वाला है और पेंट का कारोबार करता है। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने हर कैप्सूल में करीब एक ग्राम जहर भरा था। उसने करीब 50 किलो जिंक फॉस्फाइड मंगाया था। इसका इस्तेमाल चूहे मारने के जहर के रूप में होता है। आरोपी का लक्ष्य करीब 30 हजार जहरीले कैप्सूल बनाने का था। बिना परमिशन बेच रहा था कैप्सूल डीसीपी जयंत मीणा ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि आरोपी बिना किसी परमिशन के ये कैप्सूल बांट और बेच रहा था। जांच में उसने स्वीकार किया कि उसका उद्देश्य मुहर्रम जुलूस को निशाना बनाना था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी साल 2025 में ईरान और इराक गया था। इन यात्राओं का उद्देश्य क्या था और क्या इनका इस मामले से कोई संबंध है, इसकी भी जांच की जा रही है। जिंक फॉस्फाइड कितना खतरनाक, कैसे करता है असर जिंक फॉस्फाइड (Zinc Phosphide) का इस्तेमाल मुख्य रूप से चूहों को मारने के लिए किया जाता है। यह गहरे भूरे या काले रंग का रसायन होता है, जिसे दुनिया के सबसे खतरनाक रोडेंटिसाइड (Rodenticide) में गिना जाता है। जिंक फॉस्फाइड आमतौर पर कृषि और चूहों के नियंत्रण के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन इसकी आसान उपलब्धता और ज्यादा जहरीले होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां इसके बड़े पैमाने पर अवैध स्टोरेज या संदिग्ध खरीद को बेहद गंभीरता से लेती हैं। शरीर में पहुंचते ही बनती है जहरीली गैस जिंक फॉस्फाइड पेट में पहुंचने के बाद वहां मौजूद एसिड और नमी के संपर्क में आकर फॉस्फीन गैस (Phosphine Gas) बनाता है। यह गैस शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीजन का उपयोग करने से रोक देती है, जिससे कई अंग तेजी से फेल होने लगते हैं। जैसे- कम मात्रा भी हो सकती है जानलेवा मेडिकल रिसर्च के मुताबिक जिंक फॉस्फाइड की बहुत कम मात्रा भी गंभीर विषाक्तता पैदा कर सकती है। इसकी घातकता व्यक्ति की उम्र, वजन और शरीर में पहुंची मात्रा पर निर्भर करती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिंक फॉस्फाइड का कोई विशेष एंटीडोट (प्रतिरोधी दवा) नहीं है। मरीज को केवल सपोर्टिव ट्रीटमेंट देकर बचाने की कोशिश की जाती है। जिंक फॉस्फाइड की खरीद-बिक्री से जुड़े नियम जिंक फॉस्फाइड को भारत में कीटनाशक (Pesticide) की श्रेणी में रखा गया है। इसकी बिक्री और उपयोग पर कीटनाशक अधिनियम, 1968 (Insecticides Act, 1968) और उससे जुड़े नियम लागू होते हैं। यदि जहरीले पदार्थ का इस्तेमाल किसी व्यक्ति या भीड़ को नुकसान पहुंचाने की साजिश में किया गया हो, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने जैसी गंभीर धाराएं लग सकती हैं।

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