CG Snake Bite: रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अलग-अलग घटनाओं में विषैले सांपों के डंस का शिकार हुए पांच बच्चों का सफल इलाज किया गया। किसी बच्चे को करैत, किसी को कोबरा और किसी को रसेल वाइपर ने काट लिया था। सभी की हालत गंभीर थी, लेकिन समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच गई। उपचार के बाद सभी बच्चों को स्वस्थ होने पर बुधवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।![]()
अलग-अलग घटनाओं में हुए सर्पदंश
जानकारी के अनुसार धरमजयगढ़ निवासी दो सगे भाई वीर कुमार (7) और लाकेश राठिया (12) को रात में सोते समय करैत ने गर्दन पर काट लिया था। सुबह तक दोनों के शरीर में जहर फैल चुका था और उनकी हालत गंभीर हो गई थी।
सक्ती जिले के हसौद निवासी मंजू (7) को कोबरा ने पैर में काट लिया, जिससे पैर में गंभीर सूजन और फफोले पड़ गए। वहीं रायगढ़ निवासी हितेश ढंगर (5) को रसेल वाइपर ने डंस लिया, जिससे शरीर में रक्तस्राव और खून के थक्के बनने की समस्या शुरू हो गई।
इसके अलावा कलमी निवासी हर्षित प्रजापति (7) को भी सोते समय करैत ने काट लिया था। गंभीर हालत में सभी बच्चों को अलग-अलग समय पर रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया।
3 बच्चों को वेंटिलेटर पर रखा गया
अस्पताल पहुंचने पर अधिकांश बच्चों में पलकें झुकना, बोलने और निगलने में कठिनाई, मांसपेशियों में कमजोरी और सांस लेने में परेशानी जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दिए। इनमें से तीन बच्चों को तत्काल बाल गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कर वेंटिलेटर पर रखा गया।
रसेल वाइपर के डंस से पीड़ित बच्चे में रक्तस्राव और खून के थक्के बनने की समस्या को भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में नियंत्रित किया गया।
24 घंटे चला उपचार
सभी बच्चों को जरूरत के अनुसार 50 वायल तक एंटी-स्नेक वेनम, गहन चिकित्सा, लगातार निगरानी और आवश्यक जांचों के साथ 24 घंटे उपचार दिया गया। इलाज का सकारात्मक असर हुआ और सभी बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट गए।
समय पर इलाज से बची सभी की जान
अस्पताल अधीक्षक डॉ. दुर्गा शंकर पटेल ने बताया कि समय पर एंटी-स्नेक वेनम, वेंटिलेटर सुविधा और प्रशिक्षित चिकित्सकीय टीम की उपलब्धता के कारण पांचों बच्चों की जान बचाई जा सकी। उन्होंने बताया कि सभी उपचार और आवश्यक दवाएं आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क उपलब्ध कराई गईं।
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि यह सफलता रायगढ़ मेडिकल कॉलेज की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था, विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता और आधुनिक बाल गहन चिकित्सा सुविधाओं का परिणाम है। उन्होंने बताया कि बाल एवं शिशु रोग विभाग की टीम ने 24 घंटे निगरानी और समन्वित उपचार के माध्यम से सभी बच्चों को सुरक्षित स्वस्थ किया।

