दुनिया के सबसे बड़े शतरंज टूर्नामेंट फिडे वर्ल्ड कप का फॉर्मेट अगले साल से पूरी तरह से बदल जाएगा। अब शुरुआत से नॉकआउट मैच नहीं होंगे। पहले सभी खिलाड़ी स्विट्जरलैंड के थे। इसके बाद सिर्फ टॉप-16 खिलाड़ी नॉकआउट में पहुंचेंगे इससे खिलाड़ियों को ज्यादा मैच खेलने का मौका मिलेगा जानिए क्या हैं अहम बदलाव फीडे वर्ल्ड ड कप 2027 में क्या बड़ा बदलाव हुआ है? अब तक फिडे विश्व कप पूरी तरह नॉकआउट प्रारूप में खेला जाता था। 2027 से इसकी शुरुआत स्विस प्रणाली से होगी। ओपन वर्ग में 224 और महिला वर्ग में 128 खिलाड़ी हिस्सा लें। गे. ओपन के खिलाड़ियों को 56-56 के 4 ग्रुप में बांटा जाएगा। प्रत्येक खिलाड़ी 9 राउंड खेलेगा। इसके बाद प्रत्येक ग्रुप के टॉप-4 खिलाड़ी नॉकआउट के राउंड ऑफ-16 में पहुंचेंगे। इस वर्ग में दो समूह होंगे और प्रत्येक समूह से 8 खिलाड़ी आगे बढ़ेंगे। नया प्रारूप क्यों लाया गया? पहले विश्व कप करीब चार सप्ताह तक चलता था। कई खिलाड़ी पहले ही दो मैच हारकर बाहर हो जाते थे, जबकि कुछ खिलाड़ियों को लगभग एक महीने तक खेलना पड़ता था। न ही इतना लंबा टूर्नामेंट खिलाड़ियों और आयोजकों दोनों के लिए मुश्किल हो गया था। नए प्रारूप से प्रतियोगिता करीब एक सप्ताह छोटी हो जाएगी और सभी खिलाड़ी समय नियंत्रण और नॉकआउट में क्या बदलाव होगा? स्विस चरण मे दुनिया के सबसे बड़े शतरंज टूर्नामेंट फिडे वर्ल्ड कप का फॉर्मेट अगले साल से पूरी तरह बदल जाएगा। अब शुरुआत से नॉकआउट मैच नहीं होंगे। पहले सभी खिलाड़ी स्विस लीग खेलेंगे। उसके बाद सिर्फ टॉप-16 खिलाड़ी नॉकआउट में पहुंचेंगे। इससे खिलाड़ियों को ज्यादा मैच खेलने का मौका मिलेगा। जानिए क्या हैं अहम बदलाव फिडे वर्ल्ड कप 2027 में क्या बड़ा बदलाव हुआ है? अब तक फिडे वर्ल्ड कप पूरी तरह नॉकआउट फॉर्मेट में खेला जाता था। 2027 से इसकी शुरुआत स्विस सिस्टम से होगी। ओपन वर्ग में 224 और महिला वर्ग में 128 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। ओपन के खिलाड़ियों को 56-56 के 4 ग्रुप में बांटा जाएगा। हर खिलाड़ी 9 राउंड खेलेगा। इसके बाद हर ग्रुप के टॉप-4 खिलाड़ी नॉकआउट के राउंड ऑफ-16 में पहुंचेंगे। महिला वर्ग में दो ग्रुप होंगे और हर ग्रुप से 8 खिलाड़ी आगे बढ़ेंगी। नया फॉर्मेट क्यों लाया गया? पहले वर्ल्ड कप करीब चार हफ्ते तक चलता था। कई खिलाड़ी पहले ही दो मैच हारकर बाहर हो जाते थे, जबकि कुछ खिलाड़ियों को लगभग एक महीने तक खेलना पड़ता था। फिडे का मानना है कि इतना लंबा टूर्नामेंट खिलाड़ियों और आयोजकों दोनों के लिए मुश्किल हो गया था। नए फॉर्मेट से प्रतियोगिता करीब एक हफ्ते छोटी हो जाएगी और सभी खिलाड़ियों को कम से कम 9 मुकाबले खेलने का मौका मिलेगा। टाइम कंट्रोल और नॉकआउट में क्या बदलाव होगा? स्विस चरण मे दुनिया के सबसे बड़े शतरंज टूर्नामेंट फिडे वर्ल्ड कप का फॉर्मेट अगले साल से पूरी तरह बदल जाएगा। अब शुरुआत से नॉकआउट मैच नहीं होंगे। पहले सभी खिलाड़ी स्विस लीग खेलेंगे। उसके बाद सिर्फ टॉप-16 खिलाड़ी नॉकआउट में पहुंचेंगे। इससे खिलाड़ियों को ज्यादा मैच खेलने का मौका मिलेगा। जानिए क्या हैं अहम बदलाव फिडे वर्ल्ड कप 2027 में क्या बड़ा बदलाव हुआ है? अब तक फिडे वर्ल्ड कप पूरी तरह नॉकआउट फॉर्मेट में खेला जाता था। 2027 से इसकी शुरुआत स्विस सिस्टम से होगी। ओपन वर्ग में 224 और महिला वर्ग में 128 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। ओपन के खिलाड़ियों को 56-56 के 4 ग्रुप में बांटा जाएगा। हर खिलाड़ी 9 राउंड खेलेगा। इसके बाद हर ग्रुप के टॉप-4 खिलाड़ी नॉकआउट के राउंड ऑफ-16 में पहुंचेंगे। महिला वर्ग में दो ग्रुप होंगे और हर ग्रुप से 8 खिलाड़ी आगे बढ़ेंगी। नया फॉर्मेट क्यों लाया गया? पहले वर्ल्ड कप करीब चार हफ्ते तक चलता था। कई खिलाड़ी पहले ही दो मैच हारकर बाहर हो जाते थे, जबकि कुछ खिलाड़ियों को लगभग एक महीने तक खेलना पड़ता था। फिडे का मानना है कि इतना लंबा टूर्नामेंट खिलाड़ियों और आयोजकों दोनों के लिए मुश्किल हो गया था। नए फॉर्मेट से प्रतियोगिता करीब एक हफ्ते छोटी हो जाएगी और सभी खिलाड़ियों को कम से कम 9 मुकाबले खेलने का मौका मिलेगा। टाइम कंट्रोल और नॉकआउट में क्या बदलाव होगा? स्विस चरण मे
शतरंज विश्व कप; सबसे बड़े टूर्नामेंट का प्रारूप बदला: पुरस्कार राशि 22% बढ़ी, खिलाड़ियों की संख्या बढ़कर 224 हुई
By worldprime
On: जुलाई 15, 2026 1:11 अपराह्न
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