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भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट का डेटा लीक:दावा- हैकर्स ने ब्लूप्रिंट, सप्लायर्स और अन्य रिकॉर्ड की जानकारी सार्वजनिक की

On: जुलाई 15, 2026 5:05 अपराह्न
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भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट कुडनकुलम से जुड़े हजारों दस्तावेज लीक हो गए हैं। रायटर्स के मुताबिक, हैकर्स ग्रुप ‘वर्ल्ड लीक्स’ ने डार्क वेब पर इन दस्तावेजों को अपलोड करने का दावा किया है। इनमें पॉवर प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायर्स की जानकारी और अन्य रिकॉर्ड सार्वजनिक किए गए हैं। तमिलनाडु के कुडनकुलम प्रोजेक्ट में शामिल अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने बयान कर सेंध लगने की पुष्टि की। रिलायंस ग्रुप ने कहा कि थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी ‘योट्टा’ के सर्वर पर सेंध लगी थी। इस घटना की जानकारी सरकार को दे दी गई है। हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया कि कौन-सा डेटा प्रभावित हुआ। सर्वर में सेंध मई में हुई थी, जून में दस्तावेज लीक का दावा किया गया। इसकी जानकारी अब सामने आई है। न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) रिलायंस के साथ मिलकर मामले की समीक्षा कर रहा है। वहीं भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम भी इस डेटा लीक की जांच कर रही है। डेटा लीक कैसे हुआ, 6 पॉइंट में समझें… सर्वर से डेटा लीक कितना खतरनाक रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डार्क वेब पर मौजूद यदि ये दस्तावेज असली हैं, तो इनके जरिए कोई हमलावर न्यूक्लियर पावर प्लांट के सहायक सिस्टम, सप्लाई चेन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर ढंग से समझ सकता है, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है। डार्क वेब क्या है, जहां डेटा अपलोड किया गया डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है, जिसे सामान्य ब्राउजर (जैसे- क्रोम, एज या सफारी) से नहीं खोला जा सकता। इसे एक्सेस करने के लिए टोर ब्राउजर जैसे विशेष ब्राउजर की जरूरत होती है। यह इंटरनेट का छिपा हुआ हिस्सा है। यहां वेबसाइटें और यूजर अपनी पहचान छिपाकर काम कर सकते हैं। हैक किए गए डेटा, रैनसमवेयर, अवैध खरीद-बिक्री और साइबर अपराध के काम यहां होते हैं। इसलिए जब कोई हैकर डेटा चुराता है, तो वह अक्सर उसे डार्क वेब पर बेचने या सार्वजनिक करने की कोशिश करता है। 2019 में भी हो चुका है साइबर हमला साल 2019 में भी कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रशासनिक नेटवर्क में उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर समूह का मैलवेयर मिलने की पुष्टि हुई थी। उस समय NPCIL ने कहा था कि संयंत्र की परिचालन प्रणाली प्रभावित नहीं हुई थी। न्यूक्लियर पावर प्लांट कैसे काम करता है? 1. यूरेनियम से ऊर्जा बनती है रिएक्टर में यूरेनियम ईंधन का इस्तेमाल होता है। यूरेनियम के परमाणु टूटने (न्यूक्लियर फिशन) से बहुत अधिक गर्मी पैदा होती है। 2. पानी गर्म होकर भाप बनता है यह गर्मी पानी को गर्म करती है। पानी भाप में बदल जाता है। 3. भाप टर्बाइन घुमाती है तेज दबाव वाली भाप टर्बाइन को घुमाती है। 4. टर्बाइन से बिजली बनती है टर्बाइन से जुड़ा जनरेटर घूमता है और बिजली पैदा करता है। 5. भाप फिर पानी बन जाती है इस्तेमाल के बाद भाप को ठंडा करके दोबारा पानी बनाया जाता है। यही पानी फिर से रिएक्टर में इस्तेमाल होता है। ——————————-

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// Function to get current page info for sharing const currentUrl = window.location.href; const pageTitle = document.title; // --- 1. Follow Your Official Pages --- // These links go directly to the URLs you provided // Instagram Follow document.getElementById('wpliteInstagramFollow').addEventListener('click', function() { const instaUrl = 'https://www.instagram.com/worldprime.news?igsh=N3I0azl5ZTd1b3U5&utm_source=qr'; window.open(instaUrl, '_blank'); }); // Facebook Follow document.getElementById('wpliteFacebookFollow').addEventListener('click', function() { const fbUrl = 'https://www.facebook.com/share/1ATWDHQiYR/?mibextid=wwXIfr'; window.open(fbUrl, '_blank'); }); // --- 2. Share Current Page to Others --- // These remain as "Sharing" functions // WhatsApp Share document.getElementById('wpliteWhatsAppShare').addEventListener('click', function() { const whatsappUrl = 'https://api.whatsapp.com/send?text=' + encodeURIComponent(pageTitle + " " + currentUrl); window.open(whatsappUrl, '_blank'); }); // Twitter Share document.getElementById('wpliteTwitterShare').addEventListener('click', function() { const twitterUrl = 'https://twitter.com/intent/tweet?url=' + encodeURIComponent(currentUrl) + '&text=' + encodeURIComponent(pageTitle); window.open(twitterUrl, '_blank'); }); // --- 3. Mobile Native Share (The Floating Button) --- document.getElementById("mobileShareFloatingButton").addEventListener("click", function (e) { e.preventDefault(); if (navigator.share) { navigator.share({ title: pageTitle, url: currentUrl }) .then(() => console.log("Share successful")) .catch(err => console.error("Share failed", err)); } else { alert("Native sharing not supported. Use the icons below!"); } });