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CG News: गर्म पानी-तेल डालकर युवती का इलाज, छाती पर चढ़कर धर्म बदलने का बनाया दबाव; क्या है मामला?

On: मई 2, 2026 1:37 अपराह्न
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CG News: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में झाड़-फूंक और तथाकथित चमत्कारी इलाज के नाम पर 18 वर्षीय युवती की मौत के मामले में अदालत ने आरोपी महिला को उम्रकैद की सजा सुनाई है। रायपुर स्थित विशेष SC-ST कोर्ट ने दोषी ईश्वरी साहू को हत्या समेत अन्य धाराओं में दंडित किया।

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सरकारी वकील उमा शंकर वर्मा के अनुसार, कोर्ट ने आरोपी को हत्या के मामले में आजीवन कारावास के साथ ही धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत 1 वर्ष, टोनही प्रताड़ना कानून की धाराओं में 1-1 वर्ष तथा एससी-एसटी एक्ट के तहत भी सजा सुनाई है।

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मामले में सामने आया कि आरोपी महिला बिना किसी मेडिकल योग्यता के युवती का इलाज कर रही थी। वह इलाज के नाम पर उसके शरीर पर गर्म पानी और तथाकथित चमत्कारी तेल डालती थी, छाती पर चढ़कर दबाव बनाती थी और उसे प्रार्थना करने के लिए मजबूर करती थी। पीड़िता पर धर्म परिवर्तन का दबाव भी बनाया जा रहा था।

जानकारी के मुताबिक, मृतका योगिता सोनवानी मानसिक बीमारी से जूझ रही थी और उसका इलाज पहले अस्पतालों में चल रहा था। बाद में परिजन उसे गरियाबंद जिले के सुरसाबांधा गांव स्थित आरोपी महिला के पास ले गए, जहां जनवरी 2025 से कथित इलाज शुरू हुआ।

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परिजनों ने कोर्ट में बताया कि आरोपी कहती थी कि ‘ईशु मसीह ठीक करेंगे’ और इसी बहाने युवती को प्रताड़ित किया जाता था। हालत बिगड़ने के बावजूद परिवार को चुप रहने के लिए डराया गया। इलाज के दौरान 22 मई 2025 को युवती की मौत हो गई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सांस रुकना बताया गया, साथ ही शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए। कोर्ट ने गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर माना कि आरोपी की प्रताड़ना और कथित इलाज के कारण ही युवती की मौत हुई।

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धर्म स्वतंत्रता विधेयक को मंजूरी

छत्तीसगढ़ में नए धर्म स्वतंत्रता विधेयक को राज्यपाल रमेन डेका ने मंजूरी दे दी है। उन्होंने विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस कानून के तहत अवैध तरीके से धर्मांतरण के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।

अब बल, लालच, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर धर्म परिवर्तन कराने पर दोषियों को 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए का जुर्माना भरना होगा।

अगर पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति या पिछड़ा वर्ग से है, तो सजा बढ़ाकर 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए जुर्माना किया गया है।

वहीं सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और न्यूनतम 25 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। दोबारा ऐसे अपराध में दोषी पाए जाने पर सीधे उम्रकैद हो सकती है।

 

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