वर्ल्ड बैंक के प्रेसिडेंट अजय बंगा ने कहा कि विकासशील देशों में गरीबी मिटानी है तो नौकरियां देनी होंगी। उन्होंने पीपल बाय डब्ल्यूटीएफ पर ब्रोकरेज फर्म जीरोधा के सीईओ निखिल कामथ के साथ बातचीत में ग्लोबल इकोनॉमी, भारत की प्रगति और युवाओं के भविष्य को लेकर विस्तार से चर्चा की। पढ़िए इस बातचीत के संपादित अंश… सवाल: गरीबी खत्म करने का सबसे सीधा रास्ता क्या है? जवाब: बस लोगों को नौकरियां दो। लेकिन असली बात फाइनेंस की नहीं, उम्मीद की है। जब लोगों के पास काम होता है, चाहे वे नाई हों, किसान हों, बिजनेसमैन हों तो उनके पास सिर्फ कमाई नहीं होती, एक उम्मीद होती है। उम्मीद, उत्साह ऐसे आर्थिक इंजन हैं जो बुनियादी आंकड़ों जितने ही जरूरी हैं। अगर लोग भविष्य को लेकर बेफिक्र हैं, तो वे पैसा खर्च करेंगे, निवेश करेंगे और रिस्क लेंगे। लेकिन अगर नौकरी या बचत को लेकर डर है, तो हाथ खींच लेंगे। जिस दिन न्यूयॉर्क का स्टॉक मार्केट अच्छा परफॉर्म करता है, उसी दिन रेस्टोरेंट्स में वाइन की बिक्री बढ़ जाती है। असल में खरीदारी सिर्फ जरूरत के लिए नहीं होती, बल्कि यह मूड से जुड़ी है। मेरा मानना है कि अमीरों से छीनकर गरीबों को देने के बजाय हमें ‘नदी का जल स्तर’ बढ़ाना चाहिए ताकि सभी नावें ऊंची उठ सकें। सरकार का काम सही नियम और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है, जबकि नौकरियां पैदा करना प्राइवेट सेक्टर, खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों का काम है। नौकरी से सिर्फ पैसा नहीं आता, व्यक्ति में आत्मविश्वास और उम्मीद भी जगती है। सवाल: आप भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति और भविष्य को कैसे देखते हैं? जवाब: मैं भारत के भविष्य को लेकर बहुत आशावादी हूं। पिछले 20-25 सालों में भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर-चाहे वो सड़कें हों, पोर्ट्स हों या बिजली-पानी-पूरी तरह बदल गया है। जब लोगों के पास बुनियादी सुविधाएं होती हैं और वे भविष्य को लेकर सकारात्मक होते हैं, तो खपत बढ़ती है। भारत अभी उसी दौर में है जहां मध्यम वर्ग का दायरा बढ़ रहा है। समृद्धि के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा ही सबसे मजबूत स्तंभ हैं और भारत सही दिशा में है। भारत का कंज्यूमर सेक्टर उसकी जीडीपी से भी तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। युवा बचत कम और खर्च ज्यादा कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है। सड़कें, एयरपोर्ट, पोर्ट और पावर सिस्टम। देश का ग्राफ ऊपर तो जा रहा है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या सरकारें लगातार ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर, गवर्नेंस और हुनरमंद लोग तैयार करती रहेंगी जिनसे प्राइवेट सेक्टर में नौकरियां पैदा हों। सवाल: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए टूरिज्म सेक्टर की क्या भूमिका हो सकती है? जवाब: भारत के पास पहाड़ों से लेकर समुद्र तट, बेहतरीन खाना और समृद्ध संस्कृति है। इसके बावजूद यहां साल भर में 303 करोड़ (20 मिलियन) से भी कम पर्यटक आते हैं। यह भारत की असली क्षमता के मुकाबले बहुत कम है। अगर हम टूरिज्म पर सही से फोकस करें, तो यह अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। सवाल: आपने सफलता के लिए IQ और EQ के साथ DQ की बात की है, यह ‘DQ’ क्या है? जवाब: पहले लोग सिर्फ बुद्धिमानी (IQ) को देखते थे, फिर टीम वर्क और भावनाओं (EQ) को समझने का दौर आया। लेकिन आज के दौर में ‘DQ’ यानी Decency Quotient (शालीनता का स्तर) सबसे जरूरी है। इसका मतलब है कि आप कितने शालीन और ईमानदार इंसान हैं। क्या लोग आपके साथ काम करना चाहते हैं? क्या आप दूसरों को आगे बढ़ने का फेयर चांस देते हैं? सादगी और दूसरों के प्रति सम्मान ही आज की सबसे बड़ी लीडरशिप स्किल है। सवाल: नौकरी को लेकर आपके पास क्या आंकड़े हैं? जवाब: यह एक गंभीर चुनौती है। अगले 15 सालों में उभरते बाजारों में करीब 120 करोड़ युवा कामकाजी उम्र (18 साल) के हो जाएंगे। लेकिन, वर्तमान स्थिति के हिसाब से हम सिर्फ 40 करोड़ नौकरियां ही पैदा कर पाएंगे। यह 80 करोड़ नौकरियों का जो गैप है, वह दुनिया में अस्थिरता और हिंसा का कारण बन सकता है। इसीलिए वर्ल्ड बैंक का पूरा फोकस अब ‘आशा और अवसर’ पैदा करने पर है। सवाल: भारत की औसत उम्र 28 साल है, फिर भी पूंजी पुरानी पीढ़ी के हाथों में क्यों?
अजय बंगा बोले- गरीबी मिटानी है तो नौकरियां देनी होंगी:निखिल कामथ के साथ वर्ल्ड बैंक प्रेसिडेंट की बातचीत, शालीनता को बताया सफलता का मंत्र
By worldprime
On: अप्रैल 22, 2026 8:34 पूर्वाह्न
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