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इंडिगो को चौथी तिमाही में ₹2,536 करोड़ का घाटा हुआ:पिछले साल ₹3,068 करोड़ का मुनाफा हुआ था; महंगे फ्यूल से कंपनी का नुकसान बढ़ा

On: मई 29, 2026 6:59 अपराह्न
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इंडिगो एयरलाइन की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने 29 मई 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही (Q1.713FY26) के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी को ₹2,536 करोड़ का कॉन्सोलिडेटेड नेट लॉस (शुद्ध घाटा) हुआ है। पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी को ₹3,068 करोड़ का कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (शुद्ध मुनाफा) हुआ था। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इस समय कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है। कंपनी को यह घाटा मुख्य रूप से डोमेस्टिक कैपसिटी पर लगी पाबंदियों, भारतीय रुपए में आई गिरावट और हवाई ईंधन यानी फ्यूल की बढ़ती कीमतों के कारण हुआ है। इसके अलावा इस तिमाही में कंपनी पर ₹250 करोड़ का वन-टाइम चार्ज यानी एकमुश्त शुल्क भी लगा है। सालाना आधार पर घाटे के बावजूद कंपनी के ऑपरेशनल रेवेन्यू में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में इंडिगो का रेवेन्यू मामूली रूप से बढ़कर ₹22,438 करोड़ पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष (Q603FY25) की समान तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹22,152 करोड़ था। फ्यूल के बढ़े हुए खर्च का बोझ यात्रियों पर डालेंगे: इंडिगो नतीजों के साथ ही इंडिगो ने घोषणा की है कि वह घरेलू और इंटरनेशनल दोनों रूटों पर फ्यूल के बढ़े हुए खर्च का बोझ यात्रियों पर डालेगी। मिडिल ईस्ट संकट की वजह से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आ रहा है। इसके कारण एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल की लागत बढ़ गई है, जिससे निपटने के लिए कंपनी अब किरायों में बढ़ोतरी करने जा रही है। फ्यूल हेजिंग के विकल्प पर विचार कर रही कंपनी कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव को देखते हुए इंडिगो अब ‘फ्यूल हेजिंग’ की रणनीति अपनाने पर विचार कर रही है। कंपनी के एक टॉप एग्जीक्यूटिव के मुताबिक, जोखिम कम करने के उपाय पर काम किया जा रहा है। दुनिया की कई ग्लोबल एयरलाइंस तेल की कीमतों में आने वाले तेज उछाल से अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए इस रणनीति का इस्तेमाल करती हैं। एयरलाइन मैनेजमेंट का कहना है कि एविएशन सेक्टर के लिए फ्यूल प्राइस सबसे बड़ा वेरिएबल बना हुआ है, इसलिए बाजार के हालातों को देखते हुए किरायों को एडजस्ट किया जाता रहेगा। 22.3 मिलियन डॉलर की प्रीपेमेंट को मंजूरी मिली इंडिगो के बोर्ड ने कंपनी के फाइनेंस लीज ऑब्लिगेशंस (लीज देनदारियों) के आंशिक प्रीपेमेंट को मंजूरी दे दी है। यह भुगतान एक या अधिक किश्तों में कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ‘इंटरग्लोब एविएशन फाइनेंशियल सर्विसेज IFSC प्राइवेट लिमिटेड’ को किया जाएगा। इसकी कुल रकम लगभग 21.72 मिलियन डॉलर तक होगी। इस फंड का इस्तेमाल सहायक कंपनी विमान, विमान के इंजन और पार्ट्स खरीदने के लिए करेगी, जिससे एयरलाइन को खुद के एविएशन एसेट्स के मालिकाना हक मिलेंगे। कुल इनकम 26% से ज्यादा बढ़ी है: कंपनी के MD कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) राहुल भाटिया ने कहा कि वित्त वर्ष 224 बिजनेस के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण माहौल वाला रहा, जिसने हमारे मुनाफे को काफी प्रभावित किया है। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बिजनेस का बुनियादी प्रदर्शन मजबूत बना रहा। इस साल हमारी क्षमता (कैपसिटी) में 217% की बढ़ोतरी हुई और कुल इनकम 21.71% से ज्यादा बढ़ी है। अगर हम विदेशी मुद्रा (फॉरेन एक्सचेंज) के उतार-चढ़ाव और एकमुश्त मदों के प्रभाव को हटा दें, तो इंडिगो ने ₹20063,22006 करोड़ का मुनाफा कमाया है। हम लगातार उतार-चढ़ाव के बीच एक मजबूत बैलेंस शीट और पर्याप्त नकदी (लिक्विडिटी) बनाए रखने में सफल रहे हैं। मिडिल ईस्ट संकट और लेबर लॉ का असर पैसेंजर्स और लोड फैक्टर में गिरावट कंपनी की स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के अनुसार, इस तिमाही में इंडिगो के यात्रियों की संख्या में 2400% की मामूली गिरावट आई है, जो घटकर 250 मिलियन रह गई। प्रति किलोमीटर कमाई (यील्ड) भी 2.2% घटकर ₹5.20 हो गई। इसके साथ ही पैसेंजर लोड फैक्टर में 1.7% की कमी आई है और यह घटकर 85.8% पर आ गया है। 6 महीने में 17.13% गिरा इंडिगो का शेयर तिमाही के नतीजों के पहले इंटरग्लोब एविएशन का शेयर आज 4003% गिरकर 4,420 रुपए के स्तर पर बंद हुआ। कंपनी का शेयर 5 दिन में 2.3% गिरा और एक महीने में 1.72% चढ़ा है। वहीं शेयर बीते 6 महीने में 24% और एक साल में 17% गिरा है। कंपनी का मार्केट कैप 1.71 लाख करोड़ रुपए है। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन है इंडिगो मार्केट शेयर के लिहाज से इंडिगो देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है। भारतीय एयरलाइन मार्केट में कंपनी का मार्केट शेयर करीब 60% है। इसकी स्थापना 2006 में राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल ने की थी। एयरलाइन की 400 से ज्यादा एयरक्राफ्ट की फ्लीट है। इसके 50 करोड़ से ज्यादा कस्टमर हैं। क्या होता है ASKs और लोड फैक्टर? अवेलेबल सीट किलोमीटर (ASKs): इसका मतलब होता है कि एयरलाइन के पास कुल कितनी सीटें उपलब्ध थीं और उन्होंने कितने किलोमीटर की दूरी तय की। यह एयरलाइन की कुल पैसेंजर क्षमता को मापने का पैमाना है। लोड फैक्टर: इससे पता चलता है कि उड़ान के दौरान एयरलाइन की कितनी प्रतिशत सीटें भरी हुई थीं। जितना ज्यादा लोड फैक्टर होगा, एयरलाइन की क्षमता का उतना ही बेहतर इस्तेमाल माना जाता है।

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