70 के दशक की बात है। रोमांस का दौर था और हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार थे दिलीप कुमार। धर्मेंद्र उस दौर में ‘मेरा गांव मेरा देश’(1971), ‘सीता और गीता’(1972) जैसी बेहतरीन फिल्मों से खुद को फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर चुके थे। समय के साथ वो फिल्में बनाने में दिलचस्पी लेने लगे। कोई भी स्क्रिप्ट अच्छी लगती थी, तो झट से खरीद लेते। सीता और गीता में काम करते हुए धर्मेंद्र ने उस फिल्म की राइटर जोड़ी सलीम-जावेद की एक कहानी सुनी। नाम था ‘जंजीर’। सलीम-जावेद तब ‘अंदाज’ (1971) और ‘हाथी मेरे साथी’ (1971) जैसी फिल्में लिख चुके थे। कहानी पसंद आने पर धर्मेंद्र ने जंजीर की स्क्रिप्ट झट से खरीद ली। समय के साथ वो दूसरी फिल्मों में व्यस्त हो गए। एक रोज उनकी मुलाकात हसीना मान जाएगी, आन बान जैसी जुबली हिट डायरेक्ट करने वाले प्रकाश मेहरा से हुई। वो प्रोडक्शन में कदम रखने वाले थे। उन्होंने धर्मेंद्र से कहा कि वो फिल्म ‘समाधि’ बना रहे हैं, हीरो का डबल रोल होगा। धर्मेंद्र ने दिलचस्पी दिखाई और कहानी सुनी। उन्हें वो स्क्रिप्ट इतनी पसंद आई कि वो झट से इसे करने के लिए मान गए, लेकिन फिर एक डील हुई। धर्मेंद्र ने प्रकाश मेहरा से ‘समाधि’ की स्क्रिप्ट खरीद ली और बदले में 3500 रुपए लेकर जंजीर की स्क्रिप्ट थमा दी, जो सलीम-जावेद ने उन्हें दी थी। और इस तरह जंजीर की स्क्रिप्ट पहुंचीं प्रकाश मेहरा के प?
डेथ एनिवर्सरीःगहने गिरवी रख प्रकाश मेहरा ने बनाई जंजीर:फ्लॉप अमिताभ को लिया तो डिस्ट्रीब्यूटर बोले- ये लंबा-बेवकूफ कौन, नशे में कहा- मैंने तुम्हें स्टार बनाया
By worldprime
On: मई 17, 2026 4:30 पूर्वाह्न
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