क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड राजनीति जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी छत्तीसगढ़

---Advertisement---

मजदूरों के बिना सुस्त पड़ा दक्षिण भारत का उद्योग:फ्री फ्लाइट टिकट, बसें; फिर भी बंगाल, असम से लौट नहीं रहे लेबर

On: मई 14, 2026 3:51 अपराह्न
Follow Us:
red and white modern breaking news youtube thumbnail
---Advertisement---

केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों के नियोक्ता इन दिनों एक अजीब जद्दोजहद में हैं। वे मजदूरों को वापस बुलाने के लिए फ्री हवाई टिकट दे रहे हैं, लग्जरी बसें भेज रहे हैं और तनख्वाह बढ़ाने के वादे कर रहे हैं। फिर भी पश्चिम बंगाल और असम से काम करने आने वाले लाखों प्रवासी मजदूर घर पर ही हैं। वजह साफ है। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में वोट डालने गए ज्यादातर मजदूर लौटने में आनाकानी कर रहे हैं। ‘सेंटर फॉर माइग्रेशन एंड इनक्लूसिव डेवलपमेंट’ के ईडी बेनॉय पीटर कहते हैं, ‘इस बार लगभग सभी मजदूर वोट डालने घर गए, खास तौर पर इलेक्टोरल रोल के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चिंताओं की वजह से। दोनों राज्यों के रिकॉर्ड मतदान इसी का नतीजा है।’ वापसी में देरी के कई अन्य कारण भी हैं, मसलन केरल में मानसून की दस्तक, स्कूलों की छुट्टियां, बकरीद का त्योहार और खेतों की बुवाई का सीजन। पश्चिम एशिया में संकट के चलते टाइल्स और प्लाईवुड रेजिन जैसी सामग्रियों की किल्लत से कुछ सेक्टर में काम वैसे भी धीमा है। केरल इस संकट का सबसे बड़ा शिकार है। राज्य में करीब 40 लाख प्रवासी मजदूर काम करते हैं। इनमें से 70% बंगाल और असम से हैं। ‘बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ के डायरेक्टर जनरल राजू जॉन कहते हैं कि नियोक्ताओं ने हर हथकंडा अपनाया। फ्लाइट उड़ान टिकट, वेतन वृद्धि, बसें इनमें शामिल हैं। फिर भी ज्यादातर मजदूर आने के लिए तैयार नहीं हैं। तिरुपुर में हालत और भी चिंताजनक है। देश के इस सबसे बड़े निटवियर निर्यात केंद्र में उत्पादन क्षमता घटकर करीब 70% रह गई है। पश्चिम एशिया संकट से ऑर्डर पहले ही कम हैं, अब मजदूरों की कमी ने मुश्किल और बढ़ा दी है। संकट की एक गहरी परत और भी है। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में कुछ वर्षों में औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के तेज निर्माण ने वहीं रोजगार के दरवाजे खोल दिए हैं। लेयम ग्रुप के चेयरमैन जी. रमेश चेताते हैं कि अगर पूर्वी और उत्तरी राज्यों में यह रफ्तार बनी रही तो भविष्य में दक्षिण भारत के लिए मजदूर जुटाना और मुश्किल हो जाएगा। इस बीच वेतन को लेकर उम्मीदें भी बढ़ रही हैं। वेल्डिंग जैसे कामों के लिए मजदूर अब 20,000 की जगह 30,000-33,000 मांग रहे हैं। मौके का फायदा – अभी के मुकाबले डेढ़ गुना वेतन की मांग कर रहे प्रवासी श्रमिक – केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में 1.3 करोड़ प्रवासी मजदूर काम करते हैं। ये मुख्यतः यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे उत्तर और पूर्वी भारत से आते हैं। – केरल में करीब 40 लाख प्रवासी श्रमिकों में से 70% पश्चिम बंगाल और असम के हैं। इन्होंने चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, पर वे वापसी के मूड में नहीं हैं। – तिरुपुर के निटवियर इंडस्ट्री की उत्पादन क्षमता घटकर 70% रह गई है। श्रमिकों की किल्लत के बीच मजदूर डेढ़ गुना वेतन की मांग करने लगे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

red and white modern breaking news youtube thumbnail

जम्मू-कश्मीर के पुंछ में पाकिस्तानी नागरिक अरेस्ट:LoC से घुसपैठ कर अंदर आ गया था, जून में ऐसी तीसरी घटना

red and white modern breaking news youtube thumbnail

फ्रांस में पैराशूट स्कूल का प्लेन क्रैश:5 स्टूडेंट्स, 5 ट्रेनर और पायलट की मौत, ट्रेनिंग के लिए उड़ान भरते ही संतुलन बिगड़ा

red and white modern breaking news youtube thumbnail

फ्रांस में गर्मी से 1000 लोगों की मौत:जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन समेत 16 देशों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी; सड़कें पिघलीं, स्कूल बंद, जंगलों में आग

red and white modern breaking news youtube thumbnail

सऊदी अरब में हेलिकॉप्टर क्रैश, 14 लोगों की मौत:मरने वाले सभी सऊदी के नागरिक, हेलिकॉप्टर दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको का था

red and white modern breaking news youtube thumbnail

जोकोविच बोले- मैं विराट से अब तक मिला नहीं हूं: जल्द भारत जाने का प्लान बना रहा हूं, वही मुलाकात हो सकती है

red and white modern breaking news youtube thumbnail

TET Paper Leak: NEET के बाद अब TET का पेपर लीक, परीक्षा स्थगित ?

Leave a Comment

// Function to get current page info for sharing const currentUrl = window.location.href; const pageTitle = document.title; // --- 1. Follow Your Official Pages --- // These links go directly to the URLs you provided // Instagram Follow document.getElementById('wpliteInstagramFollow').addEventListener('click', function() { const instaUrl = 'https://www.instagram.com/worldprime.news?igsh=N3I0azl5ZTd1b3U5&utm_source=qr'; window.open(instaUrl, '_blank'); }); // Facebook Follow document.getElementById('wpliteFacebookFollow').addEventListener('click', function() { const fbUrl = 'https://www.facebook.com/share/1ATWDHQiYR/?mibextid=wwXIfr'; window.open(fbUrl, '_blank'); }); // --- 2. Share Current Page to Others --- // These remain as "Sharing" functions // WhatsApp Share document.getElementById('wpliteWhatsAppShare').addEventListener('click', function() { const whatsappUrl = 'https://api.whatsapp.com/send?text=' + encodeURIComponent(pageTitle + " " + currentUrl); window.open(whatsappUrl, '_blank'); }); // Twitter Share document.getElementById('wpliteTwitterShare').addEventListener('click', function() { const twitterUrl = 'https://twitter.com/intent/tweet?url=' + encodeURIComponent(currentUrl) + '&text=' + encodeURIComponent(pageTitle); window.open(twitterUrl, '_blank'); }); // --- 3. Mobile Native Share (The Floating Button) --- document.getElementById("mobileShareFloatingButton").addEventListener("click", function (e) { e.preventDefault(); if (navigator.share) { navigator.share({ title: pageTitle, url: currentUrl }) .then(() => console.log("Share successful")) .catch(err => console.error("Share failed", err)); } else { alert("Native sharing not supported. Use the icons below!"); } });