22 अप्रैल 1914 आज से ठीक 112 साल पहले अखण्ड भारत के पंजाब में पीडब्ल्यू डी में सरकारी नौकरी करने वाले विलायती राज चोपड़ा के घर बेटे बलदेव का जन्म हुआ। बलदेव राज चोपड़ा, 6 भाई-बहनों के परिवार में दूसरे नंबर पर थे। पढ़ाई में अव्वल रहने वाले बलदेव के लिए पिता ने बचपन से सोच रखा था कि इसे सरकारी अफसर बनाऊंगा। समय बीता और तैयारी शुरू कर दी गई। पाकिस्तान के लाहौर गवर्नमेंट कॉलेज में इंग्लिश में मास्टर डिग्री लेते हुए उनका इंडियन सिविल सर्विस का फॉर्म भरवाया गया। पिता को उम्मीद थी कि बेटा परीक्षा निकाल लेगा, लेकिन परीक्षा की तारीखों से ठीक पहले बलदेव की तबीयत ऐसी बिगड़ी की पूरी तैयारी में पानी फिर गया। परीक्षा दी, परिणाम आए तो वो फेल हो चुके थे। बलदेव खूब रोए। पिता ने समझाया, कुछ दिनों के लिए लंदन चले जाए, 6 महीनें बाद फिर तारीख है, तब पेपर दे देना। रोते हुए बच्चे ने एक ही जवाब दिया- अब कभी सरकारी नौकरी नहीं करूंगा। सरकारी नौकरी का सपना चूर-चूर हो गया, लेकिन किसे पता था कि वही लड़का एक दिन हिंदी सिनेमा में इतिहास रच देगा। वो फेल होने वाला लड़का था बलदेव राज चोपड़ा, जिसे देश बी.आर.चोपड़ा नाम से जानता है। जिसकी फिल्मों की तारीफ तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू तक किया करते थे। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के दंगों के बीच हिंदी सिनेमा में कदम रखने वाले बी.आर.चो?
शूटिंग रोकी तो मधुबाला को कटघरे तक ले पहुंचे बी.आर.चोपड़ा:प्रिंस ने भारत को समझने के लिए इनकी फिल्म देखी, जवाहरलाल नेहरू ने लिखी चिट्ठी
By worldprime
On: अप्रैल 22, 2026 4:30 पूर्वाह्न
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