बिलासपुर : छत्तीसगढ़ में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए नौकरी कर रहे अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही जारी है | ऐसे प्रकरणों में जाँच में “दोष सिद्ध” पाए गए सरकारी सेवकों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाने का प्रावधान है| राज्य सरकार इस पर अमल भी कर रही है,लेकिन प्रभावशील अधिकारियों को पिछले दरवाज़े से आखिर किस तरह से उपकृत किया जा रहा है,इसकी मिसाल भी सामने आ रही है| इससे जुड़े एक ताज़ा मामले में हाई कोर्ट ने जातिगत मामलो से जुड़ी “हाई पावर कमेटी “ की एक चूक को गंभीरता से लेते हुए याचिकाकर्ता PMGSY के प्रभारी ENC केके कटारे के प्रकरण में “स्टे” देते हुए राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए तीन हफ्तों की मोहलत दी है| अनुसूचित जाति वर्ग के हितों से जुड़े मामले में राज्य सरकार की बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद सरकार की मंशा पर सवालियां निशान लग गया है| मामला,फ़र्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे पहले सरकारी नौकरी हासिल करने और फिर आरक्षण के जरिए पदोन्नति का कई बार लाभ लेने से जुड़ा है|जानकारी के मुताबिक,मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने “टेक्निकल ग्राउंड” पर PMGSY के प्रभारी ENC केके कटारे के प्रकरण को “स्टे” करते हुए बरती गई विधिक त्रुटि सुधार के संबंध में जवाब दाख़िल करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन को लगभग तीन हफ़्ते का वक्त दिया है | ?
हाईकोर्ट में उजागर हुई छत्तीसगढ़ शासन की बड़ी लापरवाही, अनुसूचित जाति वर्ग के हितों पर कुठाराघात से जुड़ी याचिका,जवाब देने के लिए तीन हफ़्ते की मोहलत…
By worldprime
On: मार्च 14, 2026 2:29 अपराह्न
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