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21 लाख लेकर चली गईं शहीद शुभम की पत्नी:पिता बोले-अगर कोर्ट मैरिज की थी तो घर क्यों नहीं आई; अंतिम संस्कार में दिया गया चेक

On: जून 18, 2026 11:46 पूर्वाह्न
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असम के जोरहाट में 211 जून को वायुसेना के विमान हादसे में जहानाबाद निवासी 26 साल लेफ्टिनेंट शुभम कुमार शहीद हो गए। उनकी शहादत के बाद परिवार में सरकार की ओर से मिली सहायता राशि को लेकर विवाद शुरू हो गया है। शहीद के परिजनों का आरोप है कि बिहार सरकार की ओर से शुभम कुमार की पत्नी श्रेया राय को 229 लाख रुपए का चेक दिया गया था। श्रेया शुभम के श्राद्धकर्म से पहले ही चेक लेकर अपने मायके, उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ चली गईं। शुभम और श्रेया की अगले साल शादी होनी थी, लेकिन दोनों पहले ही कोर्ट मैरिज कर चुके थे। शुभम के परिजनों को इसकी जानकारी नहीं थी। इस वजह से सरकार ने कानूनी रूप से श्रेया को शुभम की पत्नी मानते हुए उन्हें सहायता राशि सौंपी। शहीद के पिता अमरेंद्र शर्मा ने कहा, “अगर मेरे बेटे ने सच में श्रेया से शादी की थी, तो वह मेरी बहू है और सहायता राशि पाने की हकदार भी है, लेकिन पत्नी होने के नाते उसे अपना फर्ज भी निभाना चाहिए था। पति के श्राद्धकर्म से पहले ही वह चेक लेकर अपने घर चली गई।” 21 लाख रुपए के बारे में माता-पिता को नहीं थी जानकारी बिहार सरकार की ओर से हुलासगंज के CO ने श्रेया राय को 21 लाख रुपए का सहायता राशि का चेक दिया था। परिवार वालों का कहना है कि श्रेया को चेक दिए जाने की जानकारी उन्हें नहीं थी। पिता अमरेंद्र शर्मा ने आगे बताया, “शुभम के अंतिम संस्कार के दौरान परिवार के साथ रहना चाहिए था। न तो हुलासगंज CO और न ही श्रेया राय ने मुझे चेक दिए जाने की जानकारी दी। इससे ऐसा लगता है कि चेक देने और लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। CO को चेक देने के लिए मेरे घर आना चाहिए था और श्रेया राय को भी चेक लेने के लिए अपने ससुराल आना चाहिए था।” गयाजी में शहीद शुभम का हुआ अंतिम संस्कार शनिवार को असम के जोरहाट में वायुसेना के ट्रांसपोर्ट विमान क्रैश में शुभम कुमार शहीद हो गए थे। उनका अंतिम संस्कार रविवार को गयाजी के विष्णुपद श्मशान घाट पर किया गया। शहीद को छोटे भाई छोटू ने मुखाग्नि दी। 2025 में जहानाबाद में रिश्ता देखा, तो मना कर दिया शहीद के दादा योगेंद्र शर्मा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया, “2025 में हमलोगों ने उसके लिए एक रिश्ता देखा और उसे बताया कि अब शादी कर लो। मेरे कहने के दो दिन बाद ही उसने मां से कहलवाया कि वह किसी लड़की को पसंद करता है और वह भी सेना में लेफ्टिनेंट है। जब हमने यह सुना तो हमें खुशी हुई। इसके बाद हमलोगों ने उसकी मर्जी वाली लड़की से शादी की बातचीत को आगे बढ़ाया। लड़की के परिजनों से मुलाकात हुई। दोनों परिवारों में सबकुछ खुशी-खुशी तय हो गया। दिसंबर 2025 में शादी की तारीख भी तय कर दी गई थी, लेकिन इसी बीच मेरी मां, यानी शुभम की दादी का निधन हो गया। इसके बाद हमलोगों ने शादी को एक साल के लिए टाल दिया।” दादा बोले- उसको सरकार ने मारा शुभम की शहादत को लेकर दादा ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “उसको सरकार ने मारा है। 40 साल पुराना विमान रखकर जवानों की जान लेते हैं। हमारा पेंशन बंद कर दो, सरकार की तरफ से जो सुविधाएं मिल रही हैं, सब बंद कर दो। हमलोग कमा कर खा लेंगे, लेकिन वीर जवानों को सुविधा दो, ऐसे मरने मत दो।” शुभम के दादा योगेंद्र शर्मा ने कहा, “शुभम हमारी सबसे बड़ी उम्मीद था। उसके साथ अभी हमें जिंदगी की कई खुशियां बांटनी थीं। जाने की उम्र मेरी थी, लेकिन वह चला गया।” उन्होंने बताया, “मेरा पोता जिस विमान में था, वह करीब 63 साल पुराना था। उसकी हालत ठीक नहीं थी, फिर भी उसका इस्तेमाल किया जा रहा था। यह पूरी तरह सिस्टम की लापरवाही है। सरकार की व्यवस्था में खामियां हैं कि ऐसे विमान का इस्तेमाल हमारे वीर जवानों के लिए किया जा रहा है, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकता है।” नाना बोले- 25 साल की उम्र में शुभम ने बहुत कुछ हासिल किया वहीं, शहीद के नाना सरजू शर्मा ने कहा, “मेरे नाती की मौत के लिए सरकार जिम्मेदार है। देश की सेवा करने वाला जवान ही अपने देश में सुरक्षित नहीं है। एक समय के बाद इंसान भी काम का नहीं रहता, लेकिन हमारी सरकार इतने पुराने विमान को मिशन पर भेज रही है।” उन्होंने भावुक होकर कहा, “मेरा बच्चा बहुत प्यारा था। वह हर किसी का सम्मान करता था। महज 25 साल की उम्र में उसने बहुत कुछ हासिल कर लिया था। उसका नाम लेते ही हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।” अब पढ़िए शुभम की मैट्रिक से लेकर वायुसेना में लेफ्टिनेंट बनने की कहानी मैट्रिक-इंटर में 90 पर्सेंट से ऊपर, पहले अटेम्प्ट में NDA पास फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार जहानाबाद के हुलासगंज थाना क्षेत्र के बनवरिया गांव के रहने वाले थे। वह दो भाइयों में बड़े थे। शुभम कुमार के पिता अमरेंद्र आनंद किसान हैं और मां हाउस वाइफ हैं। पिता अमरेंद्र ने कहा कि घर के बड़े बेटे होने के नाते वह बहुत जल्दी जिम्मेदारियां समझ गए थे। उन्होंने बड़ी लगन से पढ़ाई की। केजी से पांचवीं तक की पढ़ाई जहानाबाद के रामजी जीएस पब्लिक स्कूल से पूरी की। इसके बाद छठीं कक्षा में उनका आंध्र प्रदेश के सैनिक स्कूल में एडमिशन हुआ। वहीं से उन्होंने मैट्रिक और इंटर की पढ़ाई पूरी की। दोनों परीक्षाओं में उन्हें 90 प्रतिशत से अधिक अंक मिले। साल 2017 में शुभम ने पहले ही प्रयास में NDA पास कर लिया। इस दौरान रिश्तेदार और दूर-दराज से जानने वाले लोग घर आए और बधाई दी। घर की खुशियां चरम पर थीं। 3 साल तक बेटे की पुणे में ट्रेनिंग चली 2018 से 2021 तक उन्हें पुणे में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। ट्रेनिंग के बाद उनकी पहली पोस्टिंग हैदराबाद में हुई, जहां वह 11 महीने तक फ्लाइट लेफ्टिनेंट के तौर पर रहे। इसी दौरान उनकी मुलाकात उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ की रहने वाली एक फ्लाइट लेफ्टिनेंट से हुई। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। हैदराबाद के बाद शुभम की ड्यूटी गुजरात में हो गई, लेकिन इस दौरान भी वह अपनी फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रेमिका के संपर्क में रहे। गुजरात के बाद शुभम की पोस्टिंग असम में हुई। यहीं उनकी आखिरी पोस्टिंग थी। पिता ने कहा कि असम आने के बाद हमलोग खुश थे, क्योंकि घर नजदीक हो गया था। बेटे से मिलने या बेटे के घर आने में समय कम लगता था। अधिकारी ने दूसरी बार फोन कर डेथ कन्फर्म की शुभम के छोटे भाई छोटू ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 9 बजे भैया से वीडियो कॉल पर बात हुई थी। वह कह रहे थे कि बारिश तेज हो रही है। अभी जल्दबाजी में हूं, फ्री होने के बाद बात करूंगा। उस समय वह बिल्कुल सामान्य और खुश नजर आ रहे थे। इसके बाद सुबह 11 बजे एक अधिकारी का फोन आया। उन्होंने घटना की जानकारी दी और बताया कि भैया का भी निधन हो गया है। शुरुआत में हमलोगों को विश्वास नहीं हुआ। ऐसा लगा कि कोई गलत या भ्रामक सूचना होगी। इसके बाद दोबारा मेरे मोबाइल पर कॉल आया, जिसके बाद हादसे की पुष्टि हुई। यह सुनते ही मां बेहोश होने लगीं। पिता, दादा और पूरा परिवार सदमे में चला गया। ऐसा लगा जैसे पूरा परिवार टूट गया हो। मां बोलीं- पता नहीं था कि कभी लौटकर नहीं आएगा शहीद शुभम कुमार की मां पूनम देवी ने बताया, ‘शनिवार सुबह करीब 6 बजे बेटे का फोन आया था। उसने वीडियो कॉल पर कहा था, ‘मम्मी, हम मिशन पर जा रहे हैं। आप ठीक से रहिएगा और अपना ध्यान रखिएगा। 29 मई को वह घर से ड्यूटी पर गया था। हमें नहीं पता था कि मेरा बेटा आखिरी बार घर से जा रहा है और फिर कभी लौटकर नहीं आएगा। अगर यह पता होता तो मैं उसे जाने नहीं देती।’ शुभम की मां आगे कहती हैं कि उसकी शादी पहले दिसंबर में तय थी, लेकिन दादी के निधन के कारण तारीख आगे बढ़ा दी गई थी। हमने सोचा था कि होली के बाद उसकी शादी करवा देंगे, लेकिन उससे पहले ही मेरा बेटा हमें छोड़कर चला गया। कर्कट के मकान में परिवार, लोन लेकर घर बनवा रहे ग्रामीण सोनल ने बताया कि शुभम का परिवार बहुत ही सामान्य था। परिवार की आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी नहीं थी। बेटे को एयरफोर्स में नौकरी मिलने के बाद परिवार ने घर बनाने के लिए बैंक से लोन लिया था। नया घर अभी बन भी नहीं पाया है। फिलहाल परिवार कर्कट के मकान में रह रहा है। शादी और मकान, दोनों का सपना अधूरा रह गया।

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