भारतीय क्रिकेट में अजय शर्मा का नाम ऐसे खिलाड़ी के रूप में दर्ज था जिसका शानदार करियर मैच फिक्सिंग के प्रतिबंध और अदालती लड़ाइयों की भेंट चढ़ गया। क्रिकेट की मुख्यधारा से बाहर रहने के बाद शर्मा ने कोच के रूप में एक ऐसी पटकथा लिखी जो किसी बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर से कम नहीं है। 61 वर्षीय अजय शर्मा के लिए ऐतिहासिक खिताबी जीत केवल एक ट्रॉफी नहीं बल्कि उनके जीवन का ‘चक दे इंडिया’ मोमेंट है। का उदाहरण देते हुए पूछा कि जय कौन बनेगा? वीरू कौन होगा? और गब्बर जैसा प्रहार कौन करेगा? उस फिल्म में एक नहीं कई हीरो थे। शर्मा कहते हैं- टीम के हर खिलाड़ी ने अपनी भूमिका चुनी और मैदान पर उसे जीकर दिखाया। अंत में वे सभी हीरो बन गए। उन्होंने एक-एक कर पूर्व चैंपियनों को हराया। दिल्ली को उन्हीं के मैदान पर पहली बार हराया, जहां पारस डोगरा का शतक और वंशज शर्मा के 6 विकेट काम आए। अबिद मुश्ताक और आकिब नबी की घातक गेंदबाजी ने मैच पलट दिया। शर्मा का मानना है, ‘असली ताकत विश्वास था। विरोधी टीमों के पास अनुभव था, लेकिन हमारे पास लय और भरोसा था।’ भारतीय क्रिकेट में अजय शर्मा का नाम ऐसे खिलाड़ी के रूप में दर्ज था, जिसका शानदार करियर मैच फिक्सिंग के प्रतिबंध और अदालती लड़ाइयों की भेंट चढ़ गया। बरसों तक क्रिकेट की मुख्यधारा से बाहर रहने के बाद, शर्मा ने कोच के रूप में एक ऐसी पटकथा लिखी, जो किसी बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर से कम नहीं है। जम्मू-कश्मीर की रणजी ट्रॉफी की ऐतिहासिक खिताबी जीत 61 वर्षीय अजय शर्मा के लिए केवल एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उनके जीवन का ‘चक दे इंडिया’ मोमेंट है। फाइनल से पहले शर्मा ने टीम को फिल्म शोले का उदाहरण देते पूछा कि जय कौन बनेगा? वीरू कौन होगा? और गब्बर जैसा प्रहार कौन करेगा? उस फिल्म में एक नहीं कई हीरो थे। शर्मा कहते हैं- टीम के हर खिलाड़ी ने अपनी भूमिका चुनी और मैदान पर उसे जीकर दिखाया। अंत में वे सभी हीरो बन गए। जम्मू-कश्मीर ने एक-एक कर पूर्व चैम्पियनों को हराया। दिल्ली को उन्हीं के मैदान पर पहली बार हराया, जहां पारस डोगरा का शतक और वंशज शर्मा के 6 विकेट काम आए। हैदराबाद और मप्र के खिलाफ कम स्कोर पर सिमटने के बाद भी आबिद मुश्ताक और आकिब नबी की घातक गेंदबाजी ने मैच पलट दिए। सेमीफाइनल में बंगाल और फाइनल में कर्नाटक को हराकर पहली बार रणजी का सुल्तान बना। शर्मा का मानना है, ‘असली ताकत विश्वास थी। विरोधी टीमों के पास अनुभव था, लेकिन हमारे पास लय और भरोसा था।’ पिछले साल केरल से क्व भारतीय क्रिकेट में अजय शर्मा का नाम ऐसे खिलाड़ी के रूप में दर्ज था, जिसका शानदार करियर मैच फिक्सिंग के प्रतिबंध और अदालती लड़ाइयों की भेंट चढ़ गया। बरसों तक क्रिकेट की मुख्यधारा से बाहर रहने के बाद, शर्मा ने कोच के रूप में एक ऐसी पटकथा लिखी, जो किसी बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर से कम नहीं है। जम्मू-कश्मीर की रणजी ट्रॉफी की ऐतिहासिक खिताबी जीत 61 वर्षीय अजय शर्मा के लिए केवल एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उनके जीवन का ‘चक दे इंडिया’ मोमेंट है। फाइनल से पहले शर्मा ने टीम को फिल्म शोले का उदाहरण देते पूछा कि जय कौन बनेगा? वीरू कौन होगा? और गब्बर जैसा प्रहार कौन करेगा? उस फिल्म में एक नहीं कई हीरो थे। शर्मा कहते हैं- टीम के हर खिलाड़ी ने अपनी भूमिका चुनी और मैदान पर उसे जीकर दिखाया। अंत में वे सभी हीरो बन गए। जम्मू-कश्मीर ने एक-एक कर पूर्व चैम्पियनों को हराया। दिल्ली को उन्हीं के मैदान पर पहली बार हराया, जहां पारस डोगरा का शतक और वंशज शर्मा के 6 विकेट काम आए। हैदराबाद और मप्र के खिलाफ कम स्कोर पर सिमटने के बाद भी आबिद मुश्ताक और आकिब नबी की घातक गेंदबाजी ने मैच पलट दिए। सेमीफाइनल में बंगाल और फाइनल में कर्नाटक को हराकर पहली बार रणजी का सुल्तान बना। शर्मा का मानना है, ‘असली ताकत विश्वास थी। विरोधी टीमों के पास अनुभव था, लेकिन हमारे पास लय और भरोसा था।’ पिछले साल केरल से क्व
अजय शर्मा की कोचिंग में जम्मू-कश्मीर कैसे बना रणजी विजेता: फाइनल से पहले टीम को शोले फिल्म की कहानी सुनाई, जिसमें मिशन के लिए हर किरदार के पास खास टास्क था
By worldprime
On: मार्च 2, 2026 1:19 अपराह्न
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