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प्याज-टमाटर के दाम बढ़े, जून में वेज थाली 5% महंगी:नॉनवेज-थाली की कीमतों में भी इजाफा, मौसम की मार से दालों के दाम बढ़ेंगे

On: जुलाई 8, 2026 7:53 अपराह्न
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घर पर तैयार होने वाली वेज थाली की एवरेज कीमत देशभर में 22025% बढ़कर 232 रुपए हो गई है। पिछले साल जुलाई-22026 में वेज थाली की कीमत 231 रुपए थी। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने मंथली रिपोर्ट में बताया कि, जून-242 में टमाटर, प्याज, खाने का तेल और रसोई गैस सिलेंडर महंगा होने से थाली की कीमत बढ़ी है। महंगाई से आलू की कीमतों में आई गिरावट के असर भी खत्म हो गया। एजेंसी की राइस रोटी रेट (RRR) रिपोर्ट के मुताबिक, चिकन की सप्लाई घटने से नॉन-वेज थाली की कीमत भी जून में 22% महंगी हुई है। वहीं, मौसम की मार के कारण आने वाले दिनों में दालों की कीमत भी बढ़ सकती हैं। मई के मुकाबले जून में भी बढ़ी थाली की कीमत अगर महीने-दर-महीने (मई 73 के मुकाबले जून 27) के आधार पर देखें, तो वेज थाली 27% और नॉन-वेज थाली 250% महंगी हुई है। इस दौरान मासिक आधार पर टमाटर के दाम 17%, आलू के 5% और प्याज के दाम 8% बढ़े हैं, जिससे थाली की लागत ऊपर गई। वहीं कम सप्लाई के बीच ब्रॉयलर की कीमतों में भी महीने-दर-महीने के आधार पर 2% की बढ़त अनुमानित है। मिडिल ईस्ट संकट से LPG और खाद्य तेल 10% महंगे क्रिसिल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर पुशन शर्मा के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच चल रही जंग के कारण ग्लोबल लेवल पर सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इससे खाने का तेल और LPG सिलेंडर की कीमतों में सालाना आधार पर 10-73% की बढ़ी है। इससे दोनों थाली के दाम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। टमाटर 31% महंगा, ₹42 किलो हुआ, आलू 14% सस्ता जून 2025 में जो टमाटर ₹32 प्रति किलो था, वह जून 2026 में 31% महंगा होकर ₹42 प्रति किलो पर पहुंच गया है। टमाटर महंगा होने की वजह फरवरी-मार्च में ज्यादा तापमान के कारण गर्मियों की फसल की बुआई में देरी और कम रोपाई है। दूसरी तरफ, ज्यादा कीमत वाले रबी के स्टॉक के बाजार में आने से प्याज की कीमतें भी सालाना आधार पर 2% बढ़ी हैं। हालांकि, नई रबी फसल के आने से आलू की कीमतों में 14% की गिरावट आई है, जिससे थाली की लागत कम करने में मदद मिली। गर्मी से ब्रॉयलर की सप्लाई घटी, नॉन-वेज थाली 7% महंगी नॉन-वेज थाली की कीमत बढ़ने का सबसे बड़ा कारण ब्रॉयलर (चिकन) की कीमतों में सालाना आधार पर हुआ 7% का इजाफा है। नॉन-वेज थाली की कुल लागत में ब्रॉयलर का हिस्सा करीब 50% होता है। जून में भीषण गर्मी के चलते पक्षियों की मृत्यु दर बढ़ गई, उनका वजन कम हुआ और पोल्ट्री फार्म्स ने नए चूजों को रखने में कम रुचि दिखाई। इससे बाजार में ब्रॉयलर की सप्लाई काफी कम हो गई और दाम बढ़ गए। फसलों को नुकसान से दालें महंगी रहेंगी पुशन शर्मा ने बताया कि उड़द और मूंग का पुराना स्टॉक (ओपनिंग स्टॉक) पहले से ही कम है। इसके साथ ही कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में मौसम की मार के कारण दालों की पैदावार को नुकसान हुआ है, जिससे आगे भी दालों की कीमतों में तेजी रहने की आशंका है। इसी तरह, प्रमुख उत्पादक राज्यों में लगातार बारिश की कमी के कारण बुआई में देरी और नमी के तनाव से खरीफ की प्याज और टमाटर की पैदावार घट सकती है। प्याज और टमाटर के दाम ऊंचे रहने के आसार कम रबी सप्लाई और खरीफ की आवक में देरी के कारण मध्यम अवधि में प्याज की कीमतें मजबूत रहने की उम्मीद है। इसके साथ ही, खरीफ की बुआई में देरी और सीजनल तौर पर कम सप्लाई के चलते जुलाई और अगस्त के दौरान टमाटर के दाम भी ऊंचे बने रह सकते हैं। सितंबर में खरीफ की आवक बढ़ने से मिल सकती है राहत रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई के दौरान टमाटर की कीमतें काफी संवेदनशील बनी रहेंगी, क्योंकि मुख्य उत्पादक क्षेत्रों में मानसून के कारण लॉजिस्टिक्स में कोई भी बाधा या फसल को नुकसान होने से सप्लाई और घट सकती है, जिससे कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। हालांकि, सितंबर महीने से दक्षिण और पश्चिमी क्षेत्रों से खरीफ की आवक बेहतर होने के साथ कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। यह सुधार इस बात पर निर्भर करेगा कि मानसून की बारिश का वितरण कैसा रहता है, फसल की सेहत कैसी है और सप्लाई बिना किसी रुकावट के बाजार तक पहुंचती है या नहीं।

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