रायपुर। बहुचर्चित कथित छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े उत्तर प्रदेश के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी निरंजन दास को जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि केवल किसी आरोपी का आपराधिक इतिहास जमानत खारिज करने का आधार नहीं हो सकता। जब तक यह साबित न हो कि आरोपी फरार हो सकता है, गवाहों को प्रभावित कर सकता है या न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाल सकता है, तब तक उसे जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता।
जस्टिस विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने कहा कि जमानत का उद्देश्य आरोपी की ट्रायल के दौरान अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करना है। अदालत ने पाया कि राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि निरंजन दास जांच को प्रभावित करेंगे या सबूतों से छेड़छाड़ करेंगे। कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि उत्तर प्रदेश में इस मामले की जांच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और ट्रायल लंबा चलने की संभावना है।
अभियोजन के अनुसार, निरंजन दास पर आबकारी आयुक्त रहते हुए ऐसी नीति और टेंडर प्रक्रिया तैयार करने का आरोप है, जिससे नोएडा की एक कंपनी को कथित रूप से अनुचित लाभ मिला और नकली होलोग्राम के जरिए करीब 2,161 करोड़ रुपये के शराब घोटाले को अंजाम दिया गया। इस मामले में छत्तीसगढ़