CG Monsoon Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें और अंतिम दिन साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सदन में प्रस्ताव पेश किया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष सरकार के कामकाज और विभिन्न मुद्दों पर अपनी-अपनी बात रख रहे हैं।![]()
10वीं बार आया अविश्वास प्रस्ताव
राज्य गठन के बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा में किसी सरकार के खिलाफ यह 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। इससे पहले नौ बार अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई भी सरकार बहुमत खोने के कारण नहीं गिरी है।
क्यों अहम है अविश्वास प्रस्ताव
अविश्वास प्रस्ताव का उद्देश्य केवल सरकार को गिराना नहीं होता। इसके जरिए विपक्ष सरकार के पूरे कार्यकाल, नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाता है, जबकि सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां और योजनाएं सदन के सामने रखता है। चर्चा के बाद आवश्यकता होने पर मतदान कराया जाता है। यदि सरकार के पक्ष में बहुमत रहता है तो प्रस्ताव स्वतः खारिज हो जाता है।
इन मुद्दों पर सरकार को घेर रही कांग्रेस
कांग्रेस इस बार नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेर रही है। वहीं भाजपा सरकार अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक उपलब्धियों का पक्ष सदन में रख रही है।
संख्या बल सरकार के पक्ष में
विधानसभा में भाजपा के 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 35 सदस्य हैं। एक विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का है। ऐसे में संख्या बल सरकार के पक्ष में है और प्रस्ताव के पारित होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।
अब तक का रिकॉर्ड
छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में अब तक लाए गए सभी नौ अविश्वास प्रस्ताव सरकारों के पक्ष में ही समाप्त हुए हैं। वर्ष 2002 और 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। इसके बाद डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ पांच बार और भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ दो बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया, लेकिन कोई भी प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
सबसे लंबी बहस का रिकॉर्ड
विधानसभा के इतिहास में सबसे लंबी बहस वर्ष 2015 में तत्कालीन डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई थी। यह चर्चा 24 घंटे 25 मिनट तक चली थी।
प्रश्नकाल में भी अहम मुद्दे
मानसून सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल के दौरान चावल की उपलब्धता, राशन दुकानों के स्टॉक, धान खरीदी, महतारी वंदन योजना, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और सहकारिता विभाग से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा।





