भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार सियासी तस्वीर बदलने के लिए ‘मिशन 360’ में जुटे हैं। 17 अप्रैल को महिला आरक्षण व परिसीमन से जुड़े बिल पर लोकसभा में झटका लगने के बाद ही भाजपा ने संसद में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की रणनीति तेज कर दी थी। पार्टी का फोकस केवल इसी विधेयक तक सीमित नहीं बल्कि ‘एक देश-एक चुनाव’ और न्यायिक सुधारों जैसे बड़े संवैधानिक बदलावों के लिए जरूरी ‘सुपर मेजोरिटी’ हासिल करने पर है। इसके लिए भाजपा विपक्षी दलों में टूट, नए सहयोगी जोड़ने और जरूरत पड़ने पर मतदान के समय विपक्ष की गैरहाजिरी जैसे विकल्पों पर नजर रखे है। इसे संसद के मानसून सत्र तक पूरा करने का टारगेट है। पहले लोकसभा का गणित और मौजूदा स्थिति समझ लीजिए उद्धव गुट के 217 सांसद शिंदे की शिवसेना में शामिल हाल ही में टीएमसी के 2543 सांसदों के अलग होकर एनडीए को समर्थन करने और शिवसेना (उद्धव) के 2850 सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के बाद इस कयास को और बल मिल गया है। हालांकि इस जोड़तोड़ के बावजूद दो-तिहाई बहुमत के लिए 221 और सांसदों की जरूरत है। इसके लिए भाजपा की निगाह अब सपा, डीएमके, एनसीपी (शरद) जैसे दलों पर की है। महाराष्ट्र भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि शरद पवार के 2528 सांसदों में उनकी बेटी सुप्रिया सुले के अलावा बाकी 2298 भाजपा के साथ हैं। हालांकि, सरकार बिलों के संबंध में सभी दलों से बात कर रही है। केंद्र सरकार का फोकस- वोटिंग में 5543 विपक्षी सांसद गैरहाजिर रहें मिशन 2528 के 2352 बड़े टारगेट 254. परिसीमन: सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में समान रूप से 50% वृद्धि। इससे सदन की कुल संख्या लगभग 850 तक पहुंच सकती है। 2. महिला आरक्षण: परिसीमन के बाद 2029 के चुनाव से लोकसभा व विधानसभा की एक-तिहाई सीटों पर महिला आरक्षण लागू करना। 3. एक देश-एक चुनाव: लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए संवैधानिक बदलावों का रास्ता साफ करना। 4. न्यायिक/संवैधानिक सुधार: यूसीसी सहित ऐसे सुधार, जिनके लिए भविष्य में संविधान संशोधन या व्यापक सहमति की जरूरत संभव हो। परिसीमन के लिए महिला आरक्षण का नुस्खा निकाला सुप्रीम कोर्ट के वकील चिराग गुप्ता और राज्यसभा के पूर्व महासचिव विवेक अग्निहोत्री से दैनिक भास्कर दो-तिहाई बहुमत के मामले चर्चा की। दोनों के मुताबिक… ………………. यह खबर भी पढ़ें… लोकसभा सीटें बढ़ाने का बिल 3523 वोट से गिरा: पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम लोकसभा में सीटें बढ़ाने के लिए लाया गया संविधान का 131वां संशोधन बिल 17 अप्रैल को केंद्र सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई थी। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया। पूरी खबर पढ़ें…
NDA का मिशन 360, अब DMK-NCP-सपा में सेंध की तैयारी:लोकसभा में दो-तिहाई का आंकड़ा पाने अब 41 सांसदों की जरूरत; बड़े संवैधानिक बदलाव करेगी
By worldprime
On: जुलाई 2, 2026 12:32 अपराह्न
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