Teejan Bai: पद्म विभूषण से सम्मानित पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर राजकीय शोक घोषित नहीं किए जाने को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि तीजन बाई छत्तीसगढ़ की शान, पहचान और सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी प्रतीकों में थीं। उनके निधन पर राजकीय शोक घोषित किया जाना चाहिए था, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।![]()
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि तीजन बाई उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल थीं, जिन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्म विभूषण जैसे तीनों राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन में छत्तीसगढ़ की लोककला और संस्कृति को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाई। ऐसे व्यक्तित्व के निधन पर राजकीय शोक घोषित नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
5 जुलाई को हुआ तीजन बाई का निधन
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि तीजन बाई केवल लोक कलाकार नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति की राजदूत थीं। उन्होंने पंडवानी जैसी लोक विधा को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया और महाभारत जैसे महाकाव्य को छत्तीसगढ़ी भाषा में जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को उनके सम्मान में राजकीय शोक घोषित कर प्रदेश की इस महान विभूति को उचित सम्मान देना चाहिए था। ऐसा नहीं करना प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
पंडवानी को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का 5 जुलाई को रायपुर एम्स में निधन हो गया था। वह 70 वर्ष की थीं और लंबे समय से बीमार चल रही थीं। परिजनों के अनुसार, उन्होंने रविवार तड़के करीब 3:15 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर के बाद कला, साहित्य और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।


