पुस्तक का नाम – रसयात्रा – मेरी संगीत यात्रा (‘रसयात्रा – माई जर्नी इन म्यूजिक’ का हिंदी अनुवाद) लेखक – मल्लिकार्जुन मंसूर अनुवाद – मृत्युंजय प्रकाशक – राजकमल प्र कुछ किताबें ऐसी होती हैं जिन्हें पढ़ते हुए लगता है कि हम किताब के नहीं, बल्कि जीवन के पन्ने पलट रहे हैं। ‘सयात्रा’ ऐसी ही एक किताब है। यह सिर्फ एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक की आत्मकथा नहीं है। यह उस व्यक्ति की कहानी है जिसने संगीत को पेशे की तरह नहीं बल्कि जीवन की तरह जिया। अब उनका बचपन, थिएटर के दिन, गुरुओं की डांट और प्यार भी है। कभी रियाज की बातें होती हैं तो कभी महलों की चमक। मंसूर साहब कहीं भी अपने बारे में ज्यादा बात नहीं करते हैं। कई जगह तो ऐसा लगता है जैसे कोई बुजुर्ग कलाकार शाम को आराम से बैठकर अपने जीवन की कहानियां सुन रहा हो। सबसे अच्छी बात यह है कि वे प्रयोग करने से नहीं डरते हैं। इस पुस्तक की सबसे बड़ी ताकत इसकी ईमानदारी है। मंसूर साहब अपनी गलतियों को भी बताते हैं, अपनी सीमाओं को भी और अपने डर को भी। वे लिखते हैं कि कैसे एक कठिन राग का मन उन्हें बार बार समझाने की कोशिश करता है
पुस्तक समीक्षा – साधना में डूबे कलाकार की यात्रा: यह समझने के लिए कि कोई कैसे महान बनता है, मल्लिकार्जुन मंसूर की यह आत्मकथा पढ़ें
By worldprime
On: मई 21, 2026 4:30 पूर्वाह्न
---Advertisement---