Raipur E20 Petrol: रायपुर में E-20 पेट्रोल डालने के बाद कार का इंजन बार-बार खराब होने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए ग्राहक को 45 दिनों के भीतर उसी मॉडल की नई E-20 अनुकूल कार देने या फिर वाहन की पूरी कीमत 20.5 लाख रुपए लौटाने का आदेश दिया है।![]()
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित वाहन का इंजन ई-20 ईंधन के अनुरूप नहीं था, इसके बावजूद ग्राहक को कार बेची गई। इसे उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यापारिक व्यवहार और सेवा में कमी माना गया।
5 बार खराब हुई कार
जानकारी के अनुसार किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेमराज देबता ने 3 जून 2024 को मारुति की एक एसयूवी कार खरीदी थी। करीब पांच महीने बाद कार में पहली बार तकनीकी खराबी आई और वाहन बार-बार बंद होने लगा। कंपनी ने इसे मिलावटी पेट्रोल का मामला बताते हुए टंकी की सफाई कर वाहन वापस कर दिया।
इसके बाद भी समस्या खत्म नहीं हुई। दूसरी बार जांच में टंकी से सफेद जैली जैसा पदार्थ मिला। कंपनी ने माना कि पहली बार टंकी पूरी तरह साफ नहीं हुई थी। तीसरी बार फ्यूल टैंक, पाइपलाइन और फिल्टर में फिर सफेद परत मिली। चौथी बार इंजन खराब होने की चेतावनी आई और ईवी मोड ने काम करना बंद कर दिया। पांचवीं बार इंजन पूरी तरह बंद हो गया, जिसके बाद मामला कंज्यूमर कोर्ट पहुंचा।
सरकारी जांच रिपोर्ट बनी अहम आधार
मामले की सुनवाई के दौरान पेट्रोल के नमूनों की जांच सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में कराई गई। जांच रिपोर्ट में ईंधन में इथेनॉल की मौजूदगी की पुष्टि हुई। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि पेट्रोल के निचले हिस्से में सफेद परत के रूप में इथेनॉल अलग होकर जमा था।
आयोग ने माना कि वाहन का इंजन E-20 ईंधन के अनुरूप नहीं था, जबकि ग्राहक को ऐसा वाहन बेचा गया। इसी आधार पर कंपनी और डीलर को जिम्मेदार ठहराया गया।
45 दिनों में देना होगा विकल्प
आयोग ने आदेश दिया है कि कंपनी 45 दिनों के भीतर ग्राहक को उसी मॉडल की नई E-20 अनुकूल कार उपलब्ध कराए। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो वाहन की पूरी कीमत 20.5 लाख रुपए के साथ पंजीकरण, बीमा और अन्य खर्च भी लौटाने होंगे।
इसके अलावा भुगतान होने तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपए और वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपए देने का भी आदेश दिया गया है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
ऑटो विशेषज्ञ के. महेश कुमार के अनुसार इथेनॉल गन्ने से तैयार किया जाता है। यदि उसमें नमी हो तो वह पेट्रोल में समान रूप से नहीं घुल पाता, जिससे फ्यूल सिस्टम पर असर पड़ सकता है। हालांकि हर मामले में केवल इथेनॉल को इंजन खराब होने की वजह मानना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि भारत में अभी भी कई वाहन पूरी तरह E-20 पेट्रोल के अनुरूप विकसित नहीं हुए हैं। बदलते ईंधन मानकों के अनुसार वाहनों की तकनीक को भी लगातार अपडेट करने की आवश्यकता है।



