CG MLA Report Card: छत्तीसगढ़ की छठवीं विधानसभा को अस्तित्व में आए लगभग ढाई साल हो चुके हैं। इस दौरान लोकतंत्र के इस सबसे बड़े मंदिर में राज्य की जनता से जुड़े मुद्दों पर कुल 12,559 सवाल पूछे गए। पहली नज़र में यह आंकड़ा भारी-भरकम और संतोषजनक लग सकता है, लेकिन जब इस महायोग के भीतर झांककर विधायकों के व्यक्तिगत रिपोर्ट कार्ड को टटोला जाता है, तो जनता के प्रति जवाबदारी की एक बेहद निराशाजनक तस्वीर सामने आती है। (छत्तीसगढ़ के किस विधायक ने कितने प्रश्न पूछे)![]()
चुनाव के समय जो नेता जी जनता की हर बुनियादी जरूरत के लिए छाती ठोककर वादा करते थे, उनमें से कई माननीय सदन की कार्यवाही के दौरान ‘मौन व्रत’ धारण किए बैठे रहे। लोकतंत्र में किसी विधायक का सबसे बड़ा अधिकार और हथियार होता है ‘प्रश्न पूछना’। इसी के जरिए सरकार को कटघरे में खड़ा किया जाता है और जनता के हक की बात मनवाई जाती है। लेकिन इस सूची में कई दिग्गज ऐसे हैं, जिनके सवाल पूछने की रफ्तार को देखकर लगता है कि या तो उनके क्षेत्रों में कोई समस्या ही नहीं बची है, या फिर वे विधानसभा को सिर्फ हाजिरी लगाने और भत्ता पाने का जरिया मान चुके हैं।
बुनियादी मुद्दों पर मौन है माननीय
छत्तीसगढ़ आज भी कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है। ग्रामीण इलाकों में सड़क, बिजली और साफ पानी की किल्लत आज भी एक कड़वी हकीकत है। सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत और शिक्षा का गिरता स्तर हो, या जिला अस्पतालों में डॉक्टरों-दवाइयों की कमी से दम तोड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था-इन सब पर सदन में तीखे सवाल होने चाहिए थे।
इसके अलावा, प्रदेश का सबसे बड़ा आधार यानी किसान आज भी खाद की कमी और कर्ज के भंवर में फंसा है। शहरी और ग्रामीण युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति लचर हो रही है और अपराध का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है। आदिवासियों और वनांचल की आत्मा कहे जाने वाले जल, जंगल, जमीन के हक की लड़ाई सड़कों पर तो लड़ी जा रही है, लेकिन विधानसभा के भीतर इसे उठाने वाले जनप्रतिनिधि ही सुस्त पड़ गए हैं। जब जनता इन बुनियादी हकों के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है, तब हमारे कुछ माननीयों का सदन में मौन रहना एक गंभीर चिंता का विषय है।
सबसे खराब प्रदर्शन वाले विधायक (CG MLA Performance)
विधानसभा की इस सूची में सबसे निराशाजनक और आलोचनात्मक प्रदर्शन अमर अग्रवाल का रहा है, जिनका ढाई साल का कुल स्कोर ‘शून्य’ (0) है। बिलासपुर जैसी महत्वपूर्ण सीट का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद सदन में उनका यह मौन हैरान करने वाला है।
इसी तरह, पूर्व मंत्रियों और बड़े चेहरों की स्थिति भी बेहद दयनीय है। विक्रम उसेण्डी मात्र 12 सवालों के साथ सदन में औपचारिकता निभाते दिखे, तो वहीं भूलन सिंह मराबी (17 सवाल) और कद्दावर नेता भईया लाल राजवाड़े (18 सवाल) के मुंह से भी क्षेत्र की जनता के हक में बमुश्किल ही शब्द फूटे हैं। उद्देश्वरी पैकरा (23 सवाल), नीलकंठ टेकाम (23 सवाल) और कभी प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहीं रेणुका सिंह सरूता (24 सवाल) का रिपोर्ट कार्ड भी यह बताने के लिए काफी है कि जनता की बुनियादी समस्याओं (बिजली, पानी, सड़क) को सदन के पटल पर रखने में इनकी रुचि कितनी ‘कम’ रही है। (छत्तीसगढ़ विधायक रिपोर्ट कार्ड)
सबसे अच्छा प्रदर्शन वाले विधायक
विधानसभा में सबसे ज्यादा सवाल दागने के मामले में चार विधायकों ने 284 सवालों के साथ संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया है
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धरमलाल कौशिक: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और कद्दावर नेता धरमलाल कौशिक ने अपने लंबे संसदीय अनुभव का पूरा फायदा उठाते हुए 284 सवाल पूछे और जनता की समस्याओं को पुरजोर तरीके से रखा।
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अजय चंद्राकर: अपनी आक्रामक शैली के लिए जाने जाने वाले अजय चंद्राकर ने भी 284 सवाल पूछकर सदन में सरकार की नाक में दम किए रखा।
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भावना बोहरा: महिला विधायकों में सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भावना बोहरा ने भी 284 सवाल दागे और यह साबित किया कि वे क्षेत्र की जनता की आवाज को लेकर कितनी गंभीर हैं।
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भोलाराम साहू: जनहित के मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहते हुए राजनंदगांव के खुज्जी सीट से कांग्रेस विधायक भोलाराम साहू ने भी 284 सवालों के साथ टॉप परफॉर्मर्स में अपनी जगह बनाई।
इनके ठीक पीछे पुन्नूलाल मोहले (283 सवाल), धर्मजीत सिंह (280 सवाल), अंबिका मरकाम (280 सवाल) और दलेश्वर साहू (280 सवाल) जैसे नाम शामिल हैं, जिन्होंने सदन की गरिमा और जनता के भरोसे को कायम रखा है।
विधान सभा सदस्यों द्वारा पूछे गए प्रश्नों की सूची
| क्रमांक | विधायक का नाम | कुल सवाल |
| 1 | धरमलाल कौशिक | 284 |
| 2 | अजय चंद्राकर | 284 |
| 3 | भावना बोहरा | 284 |
| 4 | भोलाराम साहू | 284 |
| 5 | पुन्नूलाल मोहले | 283 |
| 6 | धर्मजीत सिंह | 280 |
| 7 | अंबिका मरकाम | 280 |
| 8 | दलेश्वर साहू | 280 |
| 9 | बालेश्वर साहू | 279 |
| 10 | चरण दास महंत | 276 |
| 11 | शेषराज हरवंश | 272 |
| 12 | सुशांत शुक्ला | 271 |
| 13 | इंद्र साव | 265 |
| 14 | हर्षिता स्वामी बघेल | 264 |
| 15 | राघवेन्द्र कुमार सिंह | 260 |
| 16 | इन्द्रशाह मंडावी | 258 |
| 17 | यशोदा निलाम्बर वर्मा | 257 |
| 18 | द्वारिकाधीश यादव | 254 |
| 19 | दिलीप लहरिया | 252 |
| 20 | राजेश मूणत | 245 |
| 21 | बघेल लखेश्वर | 245 |
| 22 | उमेश पटेल | 240 |
| 23 | चातुरी नंद | 240 |
| 24 | संदीप साहू | 240 |
| 25 | कुंवर सिंह निषाद | 240 |
| 26 | संगीता सिन्हा | 239 |
| 27 | अनुज शर्मा | 237 |
| 28 | लालजीत सिंह राठिया | 233 |
| 29 | सम्पत अग्रवाल | 232 |
| 30 | अनिला भेंडिया | 223 |
| 31 | विक्रम मंडावी | 223 |
| 32 | ओंकार साहू | 213 |
| 33 | अटल श्रीवास्तव | 206 |
| 34 | मोतीलाल साहू | 202 |
| 35 | ब्यास कश्यप | 196 |
| 36 | रामकुमार यादव | 195 |
| 37 | कविता प्राण लहरे | 178 |
| 38 | उत्तरी गनपत जांगडे | 158 |
| 39 | रामकुमार टोप्पो | 156 |
| 40 | गोमती साय | 151 |
| 41 | किरण देव | 155 |
| 42 | सावित्री मनोज मंडावी | 155 |
| 43 | लता उसेण्डी | 146 |
| 44 | विद्यावती सिदार | 141 |
| 45 | ललित चंद्राकर | 140 |
| 46 | देवेन्द्र यादव | 132 |
| 47 | दीपेश साहू | 127 |
| 48 | इन्द्र कुमार साहू | 121 |
| 49 | रोहित साहू | 115 |
| 50 | जनक ध्रुव | 109 |
| 51 | प्रबोध मिंज | 104 |
| 52 | रिकेश सेन | 103 |
| 53 | फूलसिंह राठिया | 102 |
| 54 | तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम | 101 |
| 55 | कवासी लखमा | 99 |
| 56 | आशा राम नेताम | 93 |
| 57 | सुनील कुमार सोनी | 89 |
| 58 | भूपेश बघेल | 89 |
| 59 | योगेश्वर राजू सिन्हा | 79 |
| 60 | पुरन्दर मिश्रा | 74 |
| 61 | रायमुनी भगत | 62 |
| 62 | चौतराम अटामी | 60 |
| 63 | प्रणव कुमार मरपची | 57 |
| 64 | शकुंतला सिंह पोर्ते | 56 |
| 65 | प्रेमचंद पटेल | 51 |
| 66 | डोमनलाल कोर्सेवाडा | 39 |
| 67 | विनायक गोयल | 32 |
| 68 | ईश्वर साहू | 28 |
| 69 | रेणुका सिंह सरूता | 24 |
| 70 | नीलकंठ टेकाम | 23 |
| 71 | उद्देश्वरी पैकरा | 23 |
| 72 | भईया लाल राजवाड़े | 18 |
| 73 | भूलन सिंह मराबी | 17 |
| 74 | विक्रम उसेण्डी | 12 |
| 75 | अमर अग्रवाल | 0 |
नोट:- विधानसभा नियमों के अनुसार, कोई भी सदस्य एक बैठक या सत्र के दौरान अधिकतम 4 सवाल ही पूछ सकता है। संवैधानिक और प्रशासनिक नियमों के तहत मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री और विधान सभा अध्यक्ष (स्पीकर) सदन में प्रश्न नहीं पूछते हैं, क्योंकि वे स्वयं प्रश्नों के उत्तर देने और सदन की कार्यवाही संचालित करने के लिए उत्तरदायी होते हैं। इसी कारण उपर्युक्त सूची में उनके नाम शामिल नहीं किए गए हैं।

